गोड्डा : समाहरणालय के सभा कक्ष में राष्ट्रीय हिंदी दिवस पर शनिवार को कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसमें डीडीसी देवेंद्र भूषण सिंह ने कहा कि हिंदी सभ्यता, संस्कृति व जीवन शैली भी है. हिंदी समृद्ध शाली व सरल भाषा है.
श्री सिंह ने कहा कि हिंदी के साथ कई भाषाएं जुड़ी हैं. ये भाषाएं आपस में जुड़ कर ही हिंदी को और मजबूत किया है. उन्होंने कहा कि संकल्प लें कि हिंदी को अधिक–से–अधिक लोगों के बीच पहचान बन पाये. जिला शिक्षा अधीक्षक कमला सिंह ने कहा 14 सितंबर 1949 में डॉ. राजेंद्र प्रसाद तथा ताकिर हुसैन के साथ प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू के अथक प्रयास से हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में संसद में स्वीकृति मिली.
हालांकि दक्षिण व मुंबई के कुछ नेताओं के विरोध किया था. इसके बावजूद हिंदी को आत्मा से स्वीकार किया गया है. बार अध्यक्ष देवेंद्र सिंह ने भी हिंदी को सबसे बड़ी भाषा की श्रेणी में लाकर खड़ा किया तथा कहा कि भाषा का प्रसार–प्रसार आज हर क्षेत्र में हो रहा है. वहीं शिक्षक चिंतामणि ने कहा कि हिंदी को मिल कर आगे बढ़ाने की जरूरत है.
शिक्षक योगानंद सिंह ने हिंदी के प्रसार प्रचार के लिये विद्यालय स्तर पर लेख, वाद विवाद प्रतियोगिता पर बल दिया. मौके पर बम शंकर झा, लक्ष्मण कुमार झा, अवध बिहारी सिंह, सीमा कुमारी, विनोद बिहारी मेहरा, शत्रुघ्न चौधरी, गंगाराम मुमरू, दीपक लाल, प्रमोद तिवारी, नागमणि, मदन मोहन मिश्र आदि थे.
