गोड्डा : जिले में पिछले 10 दिनों में वज्रपात से 13 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि चार लोग जख्मी हुए है. मरने वालों में चार बच्चे शामिल हैं. बारिश के दौरान तेज आवाज के साथ बादल गरजने की घटना पिछले दो वर्षो के बाद जिले में सबसे अधिक देखने को मिल रही है.
इससे पहले वर्ष 2009 तथा 2010 में करीब दो दर्जन लोगों की मौत वज्रपात से हो गयी थी. वहीं वर्ष 2011 तथा 2012 में वज्रपात से मरने वालों की संख्या में कमी आयी थी. वर्ष 2013 में केवल अगस्त माह में ही 13 लोगों की जान जा चुकी है. एक साथ पांच लोगों की मौत मेहरमा में 13 अगस्त को हुई थी.
इसके अलावा नौ अगस्त हो सुंदरपहाड़ी प्रखंड के बड़ा धमनी में एक, 10 अगस्त को सदर प्रखंड के गौरसंडा गांव में दो तथा 15 अगस्त के ही दिन मेहरमा में एक तथा गोड्डा में एक बच्चे की मौत हो गयी.
क्या कहते हैं जानकार
गोड्डा कॉलेज में रसायन विभाग के शिक्षक डॉ रंजन कुमार का कहना है कि बिजली का गिरना बरसात के दिनों में सामान्य प्रक्रिया है. उन्होंने बताया कि इससे बचाव के लिए घर से बेहतर कुछ भी नहीं हो सकता है.
वज्रपात के दौरान बड़े पेड़ अथवा लोहे की छतरी भी बचाव में रखना खतरनाक साबित हो सकता है. इस दौरान केवल कुचालक का प्रयोग करना चाहिए.
