तस्वीर: 06 इंटक के नेता तथा 07 क ोयला वाहक ट्रेन खड़ीबोआरीजोर. राजमहल परियोजना ईसीएल में संयुक्त ट्रेड यूनियन द्वारा पांच दिवसीय हड़ताल के पहले दिन परियोजना पूरी तरह से ठप्प रही. सरकार द्वारा क ोयला कंपनी के निजी घरानों के हाथों देने के विरोध में बंद के कारण उत्पादन तथा प्रेषण पर प्रभाव पड़ने से कंपनी को 10 करोड़ की क्षति का आकलन किया गया है. एटक, इंटक, सीटू, बीएमएस, झारखंड कोल मजदूर यूनियन, कोलियरी मजदूर यूनियन द्वारा दिन भर उत्पादन तथा पे्रषण के कार्य को ठप्प रखा गया. हड़ताल की वजह से 15 हजार टन कोयले का उत्पादन नहीं हो पाया. इस कारण कंपनी को 10 करोड़ रुपये की क्षति बतायी जा रही है.फरक्का व कहलगांव एनटीपीसी कोेे नहीं मिला 14 हजार टन कोयला : प्रेषण बंद रहने के कारण एनटीपीसी फरक्का व कहलगांव को जाने वाला दो-दो ट्रैक कोयले की ढुलाई नहीं हो पायी. जिसमें प्रति ट्रैक साढे़ तीन हजार टन के हिसाब से 14 हजार टन कोयले की ढुलाई बाधित रही.ब्लैक आउट की संभावना बढ़ी :एनटीपीसी कहलगांव के एजीएम गोपाल कृष्णन के मुताबिक मात्र दो दिनों के कोयले का स्टॉक है. पांच दिनों तक चलने वाले हड़ताल सेेे कोयले की कमी होगी और गोड्डा सहित संताल परगना व झारखंड में बिजली संकट गहरायेगा.1200 टन कोयले क ा हुआ उत्पादनमुख्य महाप्रबंधक अखिलेश पांडेय ने क्षति का आकलन कर दस करोड़ रुपये बताते हुए कहा कि प्राइवेट कंपनियों में शामिल मां अंबे तथा सीआईसी व महालक्ष्मी द्वारा 1200 टन कोयला का उत्पादन किया गया है.
हड़ताल के कारण ईसीएल को 10 करोड़ की क्षति// हड़ताल के पहले दिन संयुक्त ट्रेड यूनियनों के 2200 कर्मियों ने रोका काम// नहीं हुआ 15 हजार टन कोयले का उत्पादन// 14 हजार टन का डिस्पैच रुका
तस्वीर: 06 इंटक के नेता तथा 07 क ोयला वाहक ट्रेन खड़ीबोआरीजोर. राजमहल परियोजना ईसीएल में संयुक्त ट्रेड यूनियन द्वारा पांच दिवसीय हड़ताल के पहले दिन परियोजना पूरी तरह से ठप्प रही. सरकार द्वारा क ोयला कंपनी के निजी घरानों के हाथों देने के विरोध में बंद के कारण उत्पादन तथा प्रेषण पर प्रभाव पड़ने […]
