जन्म से एक माह तक के शिशुओं का होगा इलाज
डायरिया व पीलिया पीड़ित शिशु को भी मिलेगा यूनिट का लाभ
गोड्डा : शिशु मृत्यु दर में कमी लाने की पहल शुरू हो गयी है. सदर अस्पताल के एसएनसीयू में गंभीर शिशुओं का इलाज होने लगा है. सोमवार को सदर अस्पताल के लेबर रूम में सुबह 9:40 बजे एक प्रसूता रूबीना ने नवजात को जन्म दी. स्थिति ठीक नहीं रहने के कारण उसे एसएनसीयू में दी जाने वाली सुविधा दी गयी. दो घंटे के अंदर शिशु खतरे से बाहर हो आ गया. उसे वारमर इंस्ट्रूमेंट में रख कर इलाज किया गया. रूबीना हंसडीहा के सिंहनी निवासी मो सिद्दीक की पत्नी है. रुबीना का मायका गोड्डा के फसिया डंगाल है. सहिया सकीला बीबी ने उसे प्रसव हेतु सदर अस्पताल में भर्ती करायी थी. प्रसव के उपरांत शिशु को एसएनसीयू के वारमर में रख कर प्रतिनियुक्त एएनएम नीलम कुमारी व भाग्यशीला ने नवजात बच्चे को ट्रीटमेंट दी.
परिवार वालों को आर्थिक परेशानी से मिली निजात
पहले संस्थागत प्रसव के बाद गंभीर नवजात शिशु को बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता था. भागलपुर में वैसे बच्चों को वारमर आदि की सुविधा दिये जाने में प्रतिदिन के हिसाब से ढाई से चार हजार रुपये तक राशि खर्च आती थी. सदर अस्पताल में वैसी सुविधा अस्पताल में मिलने से परिवार वालों को आर्थिक परेशानी से निजात मिलेगी.
रेफर करने के मामले में आयेगी कमी
एसएनसीयू की सुविधा उपलब्ध होने से गंभीर शिशु के अस्पताल से तुरंत रेफर करने की परंपरा पर भी लगाम लगेगी. इतना ही नहीं एसएनसी यूनिट की व्यवस्था होने से चाइल्ड चिकित्सकों को नवजात के इलाज में भी सुविधा हो रही है.
