हैंडपंप और चापाकल भी या तो सूख गये हैं या फिर गंदा पानी निकल रहा है. ऐसे में लोगों की मजबूरी है पानी खरीदना या फिर दूर-दराज के इलाकों से किसी तरह पानी ढोकर लाते हैं.
बूंद-बूंद के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ती है
जलसंकट से सर्वाधिक परेशानी महिलाओं को हो रही है. महिलाओं को रोजमर्रा के घरेलू कामों के लिए पानी जुटाने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है. उनका कहना है कि उन्होंने कई बार जनप्रतिनिधियों और नगर निगम के अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया, पर अब तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है. वार्डवासियों ने नगर निगम प्रशासन से जल्द से जल्द समाधान निकालने की मांग की है.वाटर सप्लाई प्लांट की कोई मॉनीटरिंग नहीं
वार्ड संख्या 11 स्थित आदर्श नगर में लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वाटर सप्लाई यूनिट बनायी गयी थी. इस महत्वाकांक्षी योजना पर करीब 12 करोड़ रु खर्च किये गये थे. जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट है. वाटर सप्लाई यूनिट से घरों तक पहुंचनेवाला पानी न तो फिल्टर किया गया होता है और न ही उसकी गुणवत्ता की कोई नियमित जांच की जाती है. लोगों का कहना है कि सीधे नदी का गंदा पानी पाइपलाइन से घरों में पहुंचाया जा रहा है. इस कारण लोगों को मजबूरी में वही पानी उपयोग करना पड़ रहा है, जिससे बीमारियों का खतरा लगातार बना हुआ है. वाटर सप्लाई प्लांट में न तो प्रशिक्षित टेक्नीशियन समय पर आता है और न ही गुणवत्ता की जांच के लिए कोई कर्मचारी है. रखरखाव के अभाव में करोड़ों की लागत से बना यह प्लांट अब महज एक शो-पीस बनकर रह गया है.
