Giridih News :डोभा निर्माण में अनियमितता को ले तीन को शो-काॅज

Giridih News :कर्णपुरा पंचायत के करमाटांड़ गांव में सलाउद्दीन की जमीन पर डोभा निर्माण में अनियमितता का मामला प्रकाश में आया है. मामले की जांच के लिए बीडीओ द्वारा गठित दो सदस्यीय समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी. इस रिपोर्ट के आधार पर मुखिया, पंचायत सचिव और ग्राम रोजगार सेवक को बीडीओ ने शो-काॅज किया है.

मजदूरी मद में राशि उठाव के बाद मामला फंसा

जीयो टैगिंग के बाद लाभुक ने डोभा का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया है और मजदूरी मद में लगभग पचास हजार से अधिक राशि का उठाव भी कर लिया है. अब दूसरे जियो टैग के लिए जब लाभुक ने ग्राम रोजगार सेवक से संपर्क किया, तो पिछले कई माह से आश्वासन देकर टाल-मटोल किया जा रहा है. मामले से पंचायत सचिव और मुखिया को भी अवगत कराया गया. बार-बार के आश्वासन के बाद भी जब जियो टैगिंग नहीं की गयी, तो विवश होकर इसकी शिकायत बीडीओ से की गयी. बीडीओ सुनील कुमार मुर्मू ने इसे गंभीरता से लिया और दो सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी. टीम में एई मो वसीम अकरम, जेई देवेंद्र कुमार को शामिल करते हुए जांच रिपोर्ट की मांग की गयी.

योजना का निर्माण चिह्नित स्थल पर नहीं कराया गया

जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि जिस स्थल पर पहला जियो टैग किया गया, उससे 215 फीट की दूरी पर डोभा बनाया गया. रिपोर्ट के बाद बीडीओ ने इसे मनरेगा अधिनियम का उल्लंघन बताते हुए पत्रांक 4271 दिनांक 10 दिसंबर के माध्यम से मुखिया राजेंद्र प्रसाद वर्मा, पंचायत सचिव मीनाक्षी कुमारी और ग्राम रोजगार सेवक मो हासिम हुसैन को शो-काॅज किया है. कहा है कि किस परिस्थिति में योजना का निर्माण चिह्नित स्थल पर नहीं कराकर दूसरे स्थल पर कराया गया. कहा जवाब नहीं देने पर उच्चाधिकारियों से पत्राचार किया जायेगा.

स्थल में हेराफेरी का लगाया आरोप

इधर, लाभुक का कहना है कि रोजगार सेवक ने जिस स्थान पर जियो टैग किया, उस स्थान पर उसे खड़ा किया गया था. पर जो जियो टैग ऑनलाइन किया है, उसमें उसका फोटो हटा दिया गया है. इससे पता चलता है कि जियो टैग स्थल में हेराफेरी का कार्य रोजगार सेवक ने किया है. साथ ही कहा है कि इस मद में 50 हजार से अधिक की निकासी भी हुई है. प्रत्येक सप्ताह डिमांड काटने से लेकर भुगतान कराने के आदेश फलक में रोजगार सेवक का हस्ताक्षर रहता है. ऐसे में जब कार्यस्थल बदला गया, तो शुरू में ही उसके डिमांड को रोकना चाहिए था. ऐसा नहीं कर उसे आगे भुगतान के लिए दूसरे जियो टैग के नाम पर परेशान किया जा रहा है.

क्या कहते हैं रोजगार सेवक

इधर, रोजगार सेवक हासिम हुसैन का कहना है कि योजना शुरू होने के पूर्व बोर्ड के साथ जियो टैग वर्ष 2024 में किया था. तब कुछ काम हुआ था. वह मिलीभगत कर भुगतान भी ले रहा है. उसके डिमांड में उसका कोई हस्ताक्षर भी नहीं है. कहा कि कार्यस्थल बदलने की उसे सूचना भी नहीं दी गयी. स्थल बदलकर जियो टैग की बात से उसने साफ इंकार किया है.

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Author: PRADEEP KUMAR

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