प्रमाण सागर ने कहा कि यदि हम केवल धन अर्जन या प्रतिष्ठा प्राप्ति को ही जीवन का अवसर मानते हैं, तो यह अधूरी दृष्टि है. वास्तविक अवसर माता-पिता की सेवा में निहित है. उनकी सेवा से आशीर्वाद प्राप्त होते हैं, घर में सुख-शांति आती है और जीवन सार्थक बनता है. इसलिए युवाओं को चाहिए कि वे इस अवसर को पहचानें और अपने कर्तव्यों का पालन करें.
मनुष्य की भावनाओं का प्रभाव जल, वातावरण और जीवन पर पड़ता है
वातावरण एक प्रश्न के उत्तर में मुनि श्री ने भावनाओं के प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सकारात्मक भावनाएं और मंत्र-जाप मनुष्य की मानसिक अवस्था के साथ-साथ उसके आसपास के वातावरण को भी प्रभावित करते हैं. उन्होंने एक प्रयोग का उदाहरण देते हुए बताया कि तीन प्रकार के जल सकारात्मक भावनाओं से युक्त, नकारात्मक भावनाओं से प्रभावित और सामान्य को पौधों पर प्रयोग किया गया, इसके परिणामस्वरूप सकारात्मक जल से पौधों की वृद्धि बेहतर हुई, जबकि नकारात्मक जल से विकास कमजोर रहा. उन्होंने जापान के वैज्ञानिक के प्रयोगों का उल्लेख करते हुए बताया कि सकारात्मक शब्दों से प्रभावित जल के क्रिस्टल सुंदर और संतुलित बने, जबकि नकारात्मक शब्दों से प्रभावित जल के क्रिस्टल विकृत पाये गये.
मनुष्य की भावनाओं का प्रभाव जल, वातावरण और जीवन पर पड़ता है
इससे स्पष्ट होता है कि मनुष्य की भावनाओं का प्रभाव जल, वातावरण और जीवन पर पड़ता है. कहा कि एक ही रास्ते पर चलने के बावजूद लोगों को अलग-अलग परिणाम मिलते हैं, क्योंकि अंतर रास्ते में नहीं, बल्कि तरीके में होता है. बताया कि दो विद्यार्थी एक ही पुस्तक पढ़ते हैं. एक केवल पढ़ता है, जबकि दूसरा समझकर, दोहराकर और अभ्यास के साथ पढ़ता है, जिससे उसका परिणाम बेहतर होता है. इसी प्रकार व्यापार में भी सही समय पर निर्णय लेने, नियमों का पालन करने और संतुलित व्यवहार रखने से सफलता मिलती है, जबकि विलंब और गलत तरीके अपनाने से व्यक्ति पिछड़ जाता है. युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि जीवन में रास्ता बदलने की नहीं, बल्कि अपने तरीके को सुधारने की आवश्यकता है. निरंतर अभ्यास, सही दिशा और बढ़ती गति से ही लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है.
