उपायुक्त रामनिवास यादव ने बालू के अवैध खनन व परिवहन पर रोक लगाने के लिए टास्क फॉर्स गठित किया है. लेकिन, इसके बावजूद बालू के अवैध उठाव पर रोक नहीं लग पा रही है. इससे स्पष्ट है कि टास्क फोर्स पूरी तरह से फेल हो गया है. बिरनी प्रखंड से गुजरी बराकर, इरगा व स्थानीय छोटी-बड़ी नदियों से प्रतिदिन लगभग 200-250 ट्रैक्टर से बालू की ढुलाई हो रही है. एक ट्रैक्टर पर लगभग सौ सीएफटी बालू लोड रहता है.
कोडरमा व हजारीबाग जिले में भी होती है सप्लाई
यहां से बालू गिरिडीह, कोडरमा व हजारीबाग जिले के अलग-अलग सुदूरवर्ती प्रखंडों व गावों में खपायी जा रही है. इससे प्रत्येक माह राज्य सरकार को लाखों रुपये राजस्व की क्षति हो रही है. वहीं, बालू के व्यवसाय से जुड़े बालू तस्कर प्रत्येक माह मोटी कमाई कर रहे हैं.
नदियों का जलस्तर चला गया नीचे
लगातार और अत्यधिक मात्रा में अवैध तरीके से बालू का खनन होने के कारण नदियों का जलस्तर नीचे चला गया है. इन दिनों नदियों में कलकल पानी बहते हुए देखा जा सकता था, पर वह आज नदियां पूरी तरह सूख गयी है. नदियों का जलस्तर नीचे जाने से जलापूर्ति पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है. जलस्तर नीचे जाने से बाराडीह, नवादा के चिकनीबाद व कपिलो के चानो की पानी टंकी से सप्लाई नहीं हो रही है. विभाग द्वारा नदियों में बनाये गये इंटेकवेल में पानी नहीं है. इसके कारण टंकियों तक पानी नहीं पहुंच रहा है.
स्पष्ट नीति का अभाव
बिरनी प्रखंड के लोगों का कहना है कि बालू के उठाव पर सरकार की अब तक कोई स्पष्ट नीति निर्धारित नहीं की गयी है. जबकि निजी व सरकारी दोनों के भवन निर्माण काम में बालू की जरूरत पड़ती है. स्पष्ट नीति नहीं बनने के कारण लोग दोहरी मार झेलने को मजबूर हैं. अधिक कीमत पर उन्हें बालू की खरीदारी करनी पड़ती है.
इंटेकवेल तक नहीं पहुंच रहा पानी : कार्यपालक अभियंता
पेयजल व स्वच्छता विभाग (डीडब्लूएसडी) के कार्यपालक अभियंता अबिक अंबाला ने कहा कि तस्करों ने नदीं घाटों पर पांच से आठ फीट की गहराई तक बालू का उठाव कर लिया है. इस कारण नदी का जलस्तर काफी नीचे चला गया है. जलस्तर नीचे जाने से कई इंटेकवेल में पानी नहीं रहने के कारण सप्लाई बंद है.
क्या कहते हैं सीओ
सीओ संदीप मधेशिया ने कहा कि वे अपने स्तर से कार्रवाई कर रहे हैं. साथ ही दो वाहनों को पकड़ा भी गया है. इनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवायी जायेगी.
