सुदिव्य सोनू के आंदोलनकारी दौर की चर्चा, 1991 में रेलवे ट्रैक विस्फोट की घटना का किया गया जिक्र

झारखंड आंदोलन के दौरान 1991 में सुदिव्य सोनू के नेतृत्व में गिरिडीह में रेलवे पटरी उड़ाने की घटना का पूरा विवरण और इसके पीछे की सच्चाई जानें.

गिरिडीह. अलग झारखंड राज्य की मांग को लेकर साल 1991 में आंदोलन चरम पर था. इस दौरान सुदिव्य कुमार सोनू भी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे. वे अपने कार्यकर्ताओं के साथ आर्थिक नाकेबंदी समेत विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होते थे. इसी दौर में उसरी नदी पर बने रेलवे पुल के पास रेलवे पटरी को विस्फोट से क्षतिग्रस्त करने की एक गंभीर घटना सामने आने की बात कही जाती है.

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बताया जाता है कि साल 1991 में सुदिव्य सोनू के नेतृत्व में रेलवे ट्रैक को विस्फोट से क्षतिग्रस्त करने की योजना बनायी गयी थी. योजना के लिए जरूरी डेटोनेटर वायर गोमिया से लाने में उनके मित्र सुरेंद्र बर्मन ने सहयोग किया था. पुलिस की जांच से बचने के लिए डेटोनेटर को जूते में छिपाकर लाने की बात भी सामने आती है.

ट्रेन को बाधित करने की थी योजना

बताया जाता है कि योजना के तहत उसरी नदी के रेलवे पुल के पास रेलवे ट्रैक पर विस्फोटक लगाया गया और उसे सक्रिय करने के लिए कुछ दूरी पर बैटरियां रखी गयी थीं. उन दिनों मधुपुर से गिरिडीह आने वाली पैसेंजर ट्रेन रात करीब 10 बजे उसरी नदी के रेलवे पुल से होकर गुजरती थी. आंदोलनकारियों का उद्देश्य ट्रेन का परिचालन बाधित करना बताया जाता है.

निर्धारित समय के आसपास ट्रेन की रोशनी दिखाई देने पर रेलवे ट्रैक पर विस्फोट किया गया. धमाके में रेलवे पटरी क्षतिग्रस्त हुई, लेकिन ट्रेन बिना किसी बड़े नुकसान के पुल से गुजर गयी. ट्रेन में सवार यात्रियों के सुरक्षित बच जाने की बात कही गयी है.

घटना के बाद संभावित नुकसान का हुआ एहसास

घटना के बाद सुदिव्य सोनू संभावित नुकसान को लेकर काफी विचलित हुए. बताया जाता है कि उन्हें एहसास हुआ कि यदि विस्फोट के कारण ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त हो जाती, तो बड़ी संख्या में यात्रियों की जान जा सकती थी.

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बाद में उन्हें यह भी महसूस हुआ कि ऐसी किसी घटना का सबसे ज्यादा नुकसान गिरिडीह के आम लोगों को ही उठाना पड़ सकता था. इस घटना ने आंदोलन के दौरान अपनाये गये उग्र तरीकों के संभावित परिणामों को लेकर भी चिंता पैदा की.

पुलिस ने तेज की थी जांच

घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच तेज की और सघन अभियान चलाया. इसी क्रम में घटना में शामिल होने के आरोप में बैजू राणा को उस समय गिरफ्तार किये जाने की बात कही गयी है.

यह घटना झारखंड आंदोलन के उस दौर की चर्चा में आने वाली घटनाओं में शामिल रही, जब अलग राज्य की मांग को लेकर आंदोलनकारी विभिन्न स्तरों पर आंदोलन कर रहे थे.

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By Rakesh sinha

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