नारायण महतो ने कहा कि सहायक अध्यापकों ने दो दशकों से झारखंड प्रदेश में शिक्षा का अलख जगाते रहे हैं. लेकिन, अब तक सरकार का उनके प्रति सकारात्मक सोच नहीं बन पा रही है. सुविधाओं के नाम पर उन्हें सिर्फ आश्वासन मिला है. सरकार अपने वादे से मुकर रही है. इसके कारण राज्य के 60000 सहायक अध्यापकों में आक्रोश बढ़ रहा है.
मांगों की पूर्ति करे सरकार
श्री महतो ने कहा कि यह आक्रोश कभी भी सरकार के खिलाफ सड़कों पर दिख सकता है. उन्होंने कहा कि दो दशकों से अधिक समय तक अध्यापन कार्य करने के बाद भी वेतनमान के समतुल्य मानदेय नहीं दिया जा रहा है. मंच के माध्यम से उन्होंने मांग की है कि सहायक अध्यापकों को समान कार्य के लिए समान वेतन, अनुकंपा का लाभ दिया जाये. वहीं, सर्वसम्मति से सर्विस बुक जमा करने के लिए निर्णय लिया गया. कहा गया कि शहरी क्षेत्र में चुनाव लगभग तीन माह बाद भी सहायक अध्यापकों की अब तक सेवा संपुष्टि नहीं हो पायी है. इसके कारण वे लगभग तीन वर्षों से चार प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि का लाभ से वंचित हैं. सरिया प्रखंड के बायोमीट्रिक के हवाला देकर 10 सहायक अध्यापकों का तीन वर्षों से एक माह का मानदेय से वंचित रखा गया है.
कर्मचारी भविष्य निधि के लिए नहीं काटी जा रही
राशि
कर्मचारी भविष्य निधि में सरिया प्रखंड के लगभग शिक्षकों का पेंशन मद में राशि की कटौती नहीं की जा रही है. कुछ शिक्षकों का कटौती की जा रही है. मौके पर राजेंद्र ठाकुर, नारायण महतो, लक्ष्मण प्रसाद, नारायण यादव, महेश ठाकुर, अजय मंडल, रामधनी महतो, बुलाकी मंडल, जागेश्वर महतो, महादेव प्रसाद सिंह, दीपेंद्र सिंह, रामचंद्र मरांडी, बलराम शरण पांडेय आदि मौजूद थे.
