डुमरी इसरी बाजार के शिवाजी नगर स्थित हनुमान नगर में रविवार की रात सर्पों की देवी मां मनसा की पूजा श्रद्धा और भक्ति के साथ की गयी. हर वर्ष की तरह इस बार भी कॉलोनी में मां मनसा पूजा का आयोजन किया गया. शाम करीब सात बजे पुजारी ने श्रद्धालुओं की मौजूदगी में विधि-विधान से पूजा-अर्चना शुरू करायी. इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों के साथ दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भी हिस्सा लिया.
विधि-विधान से हुई पूजा-अर्चना
पूजा के दौरान मां मनसा की प्रतिमा के समक्ष श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की और सुख-शांति की कामना की. आयोजन में कॉलोनी के लोगों की सक्रिय भागीदारी रही. पूजा संपन्न होने के बाद बंगाली कलाकारों ने भजन-कीर्तन प्रस्तुत किया. भक्ति गीतों के दौरान श्रद्धालु भक्ति में झूमते नजर आये. कार्यक्रम में शामिल लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया.
आयोजन में स्थानीय लोगों ने दिया सहयोग
पूजा आयोजन को सफल बनाने में कॉलोनी के लोगों ने सहयोग किया. आयोजन से जुड़े लोगों के अनुसार गोविंद वर्णवाल, मनोज पासवान, सुरेश चौरसिया, अशोक कुमार, नवीन वर्णवाल, दिलीप कुमार, शिवशंकर स्वर्णकार, प्रो. मोहन लाल प्रसाद, वीरू प्रसाद विश्वकर्मा, योगेंद्र वर्णवाल, विनय वर्णवाल, शशि स्वर्णकार और देवेश कुमार देव समेत अन्य लोगों की सक्रिय भूमिका रही.
26 वर्षों से चली आ रही पूजा की परंपरा
हनुमान नगर निवासी शिक्षक देवेश कुमार देव के अनुसार मां मनसा की पूजा की परंपरा इसरी बाजार में वर्ष 2000 के बाद शुरू हुई. उन्होंने बताया कि फूल व्यवसायी गोविंद वर्णवाल के स्वर्गीय पिता अपने पैतृक गांव रोशनाटुंडा में मां मनसा की पूजा करते थे. इसके बाद इसरी बाजार में भी पूजा शुरू की गयी. समय के साथ हनुमान नगर के लोगों की भी आयोजन में भागीदारी बढ़ी और यह पूजा कॉलोनी की वार्षिक परंपरा का हिस्सा बन गयी.
सर्पदंश से बचाव की मान्यता से जुड़ी है पूजा
स्थानीय मान्यता के अनुसार मां मनसा की पूजा सर्पों और जहरीले कीड़े-मकौड़ों के प्रकोप से बचाव के उद्देश्य से की जाती है. मां मनसा से जुड़ी कई लोक कथाएं भी क्षेत्र में प्रचलित हैं. पूजा के दौरान धान का लावा, गुड़ और अरसा का पकवान भोग के रूप में चढ़ाया गया. धार्मिक अनुष्ठान के बाद श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया.
शोभायात्रा निकालकर किया गया प्रतिमा विसर्जन
पूजा के अगले दिन सोमवार की दोपहर मां मनसा की प्रतिमा की विसर्जन शोभायात्रा निकाली गयी. इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए. पूजा-अर्चना और निर्धारित धार्मिक परंपराओं के पालन के बाद प्रतिमा का विधिवत विसर्जन किया गया. इसके साथ ही हनुमान नगर में आयोजित मां मनसा पूजा का समापन हुआ.
