मुनि प्रमाण सागर ने कहा कि अहिंसा, अपरिग्रह, अनेकांत और आत्मोत्थान का संदेश आज पूरे विश्व के लिए अत्यंत प्रासंगिक है. मुनि श्री ने कहा कि जैन धर्म भारत के प्राचीनतम धर्मों में से एक है और इसका संबंध भारतीय संस्कृति जितना ही प्राचीन है. यह केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि जीवन को शुद्ध, शांत और समतामय बनानेवाला दर्शन है.
जैन धर्म की सबसे बड़ी पहचान अहिंसा है
मुनि ने कहा कि जैन धर्म की सबसे बड़ी पहचान अहिंसा है. यह केवल किसी प्राणी की हत्या न करने तक सीमित नहीं, बल्कि मन, वचन और व्यवहार से किसी को पीड़ा नहीं पहुंचाने की भावना है. जैन दर्शन में सूक्ष्म से सूक्ष्म जीव की रक्षा करने का विधान है तथा चींटी से लेकर हाथी तक सभी जीवों के अस्तित्व को स्वीकार कर सम्मान दिया गया है. मुनि श्री ने कहा कि यदि विश्व जैन धर्म की अहिंसा को अपनायें, तो युद्ध, आतंकवाद, हिंसा और पर्यावरण संकट जैसी समस्याओं में काफी कमी आ सकती है.
