जानकारी के मुताबिक पचंबा, बिशनपुर, मकतपुर, सिहोडीह, भंडारीडीह, शास्त्रीनगर, बाभनटोली, झिंझरी मोहल्ला, मोहलीचुआं, शिवपुरी, करबला रोड, बरवाडीह, कोलडीहा, योगीटांड़ जैसी घनी आबादी वाले इलाकों में पेयजल का संकट विकट हैं. अलसुबह महिलाएं बाल्टी व जार के साथ नलों के पास कतार में लग जाती हैं. कई बार आवश्यकतानुसार जलापूर्ति नहीं होने से परेशानी बढ़ जाती है. कई लोग जार से पानी खरीदने को मजबूर होते हैं. जिन लोगों की निजी बोरिंग है, उन्हें तो दिक्कत नहीं होती, पर शहरी जलापूर्ति पर निर्भर लोगों को गर्मी में भीषण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. जल जीवन है और निगम क्षेत्र में अभी जीवन ही संकट में है.
निगम क्षेत्र में पांच प्लांटों से होती है शहरी जलापूर्ति
निगम के जिम्मे पांच प्लांटों क्रमश: खंडोली ओल्ड प्लांट, खंडोली न्यू प्लांट, चैताडीह प्लांट, महादेव तालाब रोड प्लांट तथा कमलजोर स्थित प्लांट से जलापूर्ति है. खंडोली ओल्ड प्लांट एवं खंडोली न्यू प्लांट से बरगंडा, न्यू बरगंडा, कालीबाड़ी, अरगाघाट, मकतपुर, बरमसिया, करबला रोड, बीबीसी रोड, शास्त्रीनगर, बक्शीडीह रोड, कचहरी रोड, पावर हाउस रोड, बाभनटोली, शिव मोहल्ला आदि इलाकों में जलापूर्ति होती है. चैताडीह प्लांट से चैताडीह, भंडारीडीह, पचंबा, अलकापुरी, बिशनपुर, बक्सीडीह, कमरशाली, मवेशी अस्पताल परिसर आदि इलाकों में जलापूर्ति होती है. महादेव तालाब वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से बड़ा चौक, व्हीटी बाजार, कोलडीहा, गांधीचौक, वहीं कमलजोर स्थित प्लांट से अंबाटांड़, कमलजोर, सिमरियाधोड़ा, नयाधोड़ा, नीचे पहाड़ीडीह, झगरी हरिजन मोहल्ला व झगरी मुस्लिम मोहल्ला आदि इलाकों में जलापूर्ति होती है. खंडोली ओल्ड प्लांट एवं खंडोली न्यू प्लांट पर शहरी क्षेत्र की बड़ी आबादी निर्भर है.
बढ़ती आबादी के साथ नहीं बढ़े संसाधन
2011 की जनगणना के मुताबिक गिरिडीह शहर की आबादी करीब 1.43 लाख थी, जो कि 2026 में तीन लाख से अधिक हो चुकी है. नगर परिषद के वक्त 30 वार्ड था. नगर निगम बनने के बाद क्षेत्र का विस्तार हुआ और वार्ड बढ़कर 36 हो गये. हाल के वर्ष में शहरी क्षेत्र में नये-नये मोहल्ले बसे, बहुमंजिले भवन बने, पर पेयजल के संसाधन उस अनुपात में नहीं बढ़े. वर्ष 2008 की गिरिडीह शहरी जलापूर्ति योजना 1.5 लाख की आबादी को ध्यान में रखकर डिजाइन की गयी थी. उस दौरान नागार्जुन कंपनी ने पाइपलाइन बिछायी थी. हालांकि योजना के क्रियान्वयन के दौरान कई इलाकों में पाइप मिसिंग की शिकायत होती रही. यह व्यवस्था आज भी कायम है. आज वही योजना तीन लाख से ज्यादा लोगों का बोझ उठा रही है. अहम बात है कि नगर निगम क्षेत्र में बढ़े छह नये वार्डों में पाइपलाइन का विस्तार नहीं हो पाया है. लिहाजा इस इलाके के लोगों को शहरी जलापूर्ति का लाभ नहीं मिल पा रहा है. हालांकि नगर निगम की ओर से नये वार्डों में जलापूर्ति योजना को लेकर डीपीआर बनवाने की बात कही जा रही है.
जरूरत के मुताबिक नहीं हो रही है जलापूर्ति
नगर निगम क्षेत्र में शहरवासियों की जरूरत के मुताबिक जलापूर्ति नहीं हो रही है. इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. इस बाबत विकास केडिया ने कहा कि निगम क्षेत्र की आबादी बढ़ गयी है, पर संसाधनों में बढ़ोतरी नहीं की जा सकी है. निगम की ओर से शहरवासियों से जलकर लिया जाता है, पर उन्हें दोनों पहर पानी नहीं दिया जाता है. विकास कुमार का कहना है कि बढ़ती आबादी के मुताबिक संसाधन बढ़ाने की जरूरत है. इरफान अंसारी का कहना है कि प्राय: गर्मी में जल संकट की स्थिति उत्पन्न हो जाती है. इसे लेकर प्लानिंग के तहत कार्य करने की जरूरत है. सिर्फ वादा नहीं, बल्कि धरातल पर काम दिखना चाहिए. सुरेश कुमार का कहना है कि जलापूर्ति को लेकर टैक्स का भुगतान किया जाता है, परंतु सुविधा आशानुरूप नहीं मिल पा रही है. इस दिशा में नगर निगम को ठोस कदम उठाने की जरूरत है. लोगों का कहना है कि नगर निगम से दोनों पहर पानी की आपूर्ति की मांग की जा रही है, परंतु इस दिशा में कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है.
श्री साईं कंस्ट्रक्शन को 27 करोड़ में मिला है संचालन का जिम्मा
पांच साल के लिए 27 करोड़ में शहरी जलापूर्ति की जिम्मेदारी श्री साईं कंस्ट्रक्शन को मिली है. संचालन के साथ देखरेख भी उसे करनी है. ठेकेदार के कार्यों की मॉनिटरिंग निगम को करना है. फिलहाल गिरिडीह निगम क्षेत्र में नागार्जुन कंपनी के जलापूर्ति संबंधी कार्य पर शहर की निर्भरता है. कई बार व्यवस्था सुधारने की मांग की जाती है, पर इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाने से स्थिति यथावत है. स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित संवेदक को जनहितार्थ कदम उठाने की जरूरत है. नगर निगम को उक्त कार्ययोजना पर विशेष नजर रखने की जरूरत है.
क्या कहते हैं वार्ड पार्षद
भीषण गर्मी के बीच लगातार पेयजल आपूर्ति बाधित रहने से भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. वार्ड छह में कृष्णा नगर, लखारी, शिवपुरी, बोड़ो, शशांक बेड़ा जैसे कई क्षेत्रों में कई दिनों से नियमित जलापूर्ति नहीं हो रही है.
संजीव कुमार, वार्ड नं छह
नगर निगम के महापौर, उप महापौर एवं नगर आयुक्त से कई बार मांग की गयी है कि जलापूर्ति करने वाली एजेंसी ढंग से काम नहीं कर रही है, इसलिए उसकी मनमानी पर लगाम लगाते हुए जलापूर्ति व्यवस्था शीघ्र दुरुस्त की जानी चाहिए.समीर दीप, वार्ड नं सात
दीर्घकालिक समाधान के लिए ठोस योजना बनाकर उसे प्रभावी ढंग से लागू करने की जरूरत है. उप नगर आयुक्त की ओर से जल्द सुधार करने का आश्वासन दिया गया है, पर जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस परिणाम चाहती है.दीपक कुमार यादव, वार्ड नं 29
जरूरत के मुताबिक शहरी क्षेत्र में जलापूर्ति नहीं हो पा रही है. इससे समस्या उत्पन्न हो रही है. विभागीय उदासीनता बरकरार रही तो लोगों का क्षोभ व्यापक आक्रोश का रूप ले सकता है. यह स्थिति व्यवस्था के लिए उचित नहीं होगी. निगम इसे गंभीरता से ले.
पूजा कुमारी, वार्ड नं 15
क्या कहते हैं नगर निगम के उप नगर आयुक्त
नगर निगम के उप नगर आयुक्त प्रशांत कुमार लायक ने कहा कि जनहित को लेकर नगर निगम काफी गंभीर है. उन्होंने कहा कि वोल्टेज की कमी के कारण जलापूर्ति व्यवस्था के संचालन में परेशानी होती है. कहा कि पिछले कई दिनों से यह समस्या है. निश्चित रूप से जलापूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ करने का कार्य किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि गिरिडीह नगर निगम क्षेत्र की आबादी बढ़ रही है. ऐसे में संसाधनों को दुरुस्त करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि नियमित जलापूर्ति के साथ-साथ जरूरत के मुताबिक टैंकरों से प्रभावित इलाकों में जलापूर्ति की जा रही है. हर घर तक पानी पहुंचाने की दिशा में हरसंभव कदम उठाये जा रहे हैं.
गिरिडीह शहरी जलापूर्ति : उपलब्ध संसाधन
जल प्रशोधन संयंत्र – कुल क्षमता
1. खंडोली ओल्ड प्लांट – 5.4 एमएलडी
2. खंडोली न्यू प्लांट – 7 एमएलडी
3. चैताडीह प्लांट – 11 एमएलडी4. महादेव तालाब रोड प्लांट – 7 एमएलडी
5. कमलजोर स्थित प्लांट – 2.5 एमएलडी
कुल क्षमता – 32.9 एमएलडीजलमीनार/संप – क्षमता
1. झंडा मैदान जलमीनार – 20 लाख लीटर
2. व्हीटी बाजार जलमीनार – 20 लाख लीटर3. बाभनटोली जलमीनार – 12 लाख लीटर
4. मवेशी अस्पताल जलमीनार – 12 लाख लीटर
5. मवेशी अस्पताल जलमीनार 2 – 7.5 लाख लीटर
6. बाजार समिति जलमीनार – 12 लाख लीटर7. पचंबा जलमीनार – 4.5 लाख लीटर
8. मछली बाजार जलमीनार – 4.5 लाख लीटर
9. पेयजल व स्वच्छता संप – 3 लाख लीटर
10. कलाली सम्प – 3.5 लाख लीटर11. कमलजोर स्थित जलमीनार – 5.3 लाख लीटर
