बताया जाता है कि कि लघु सिंचाई विभाग ने बुढ़वा आहार के जीर्णोद्धार कार्य की स्वीकृति दी थी. इसकी प्राक्कलित राशि करीब 91 लाख रु थी. विरोध जता रहे स्थानीय मुखिया दशरथ रविदास, मोहन साव, लेखराज साव, परमेश्वर साव, बालेश्वर साव, रामचंद्र साव, विक्रम कुमार साव, दीपक कुमार साव, अखलेश्वर राय, प्रदीप राय, राजेश शर्मा, डेगन साव, बिनोद शर्मा, सुनील शर्मा आदि ग्रामीणों ने बताया कि संवेदक ने तालाब से मात्र एक से दो फीट तक गड्ढा कर मिट्टी का उठाव किया जा रहा है.
उच्चस्तरीय जांच को ले मुख्य सचिव को भी दिया गया ज्ञापन
बताया कि इस तालाब में पानी भर जाने से चितरोकुरहा, सलयडीह उर्फ खोरोडीह, नीमाडीह, पांडेयडीह सहित अन्य गांव के किसानों के सैकड़ों एकड़ भूमि पर सिंचाई होती है. तालाब से प्राक्कलन के अनुरूप मिट्टी की कटाई नहीं होने से तालाब के अनुसार बरसात का पानी जमा नहीं हो पायेगा. पानी के अभाव में उपरोक्त गांव के किसानों की सिंचाई नहीं हो पायेगी. ग्रामीणों ने बताया कि रात के अंधेरे में संवेदक द्वारा पोकलेन मशीन से तालाब की खुदाई की जा रही है. ग्रामीणों ने मामले की उच्च स्तरीय जांच कर संवेदक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. ग्रामीणों ने इस बाबत झारखंड सरकार के मुख्य सचिव, गिरिडीह डीसी एवं लघु सिंचाई विभाग के कार्यपालक अभियंता को आवेदन दिया है.
पूछताछ किये जाने पर धमकी देने की शिकायत
ग्रामीणों ने बताया है कि तालाब के मेढ़ को काटकर पूरा पानी निकाल दिया गया है. दो माह बाद भी आज तक 25 फीसदी कार्य नहीं हो पाया है. पूरे तालाब में एक से दो फीट गहराई तक ही मिट्टी का उठाव हुआ है. ग्रामीणों की देखरेख में काम नहीं करके रात में पोकलेन मशीन लगाकर लीपापोती की जा रही है. बताया कि पूछताछ करने पर धमकी दी जाती है. इस मनमाने रवैया के खिलाफ ग्रामीणों में आक्रोश है.
जांच में लापरवाही की पुष्टि हुई है : जेइ
इस बाबत लघु सिंचाई विभाग के जेइ आलोक कुमार ने जीर्णोद्धार कार्य में मनमानी को लेकर ग्रामीणों की शिकायत मिलने की पुष्टि की है. जांच में संवेदक की लापरवाही सामने आयी है. काफी मंद गति से काम किया जा रहा है. तय समय में कार्य नहीं करने पर भुगतान पर रोक लगा दी जायेगी.
