इस दौरान नुक्कड़ नाटक के माध्यम से ग्रामीणों को अंधविश्वास के दुष्परिणाम व महिलाओं पर होनेवाले अत्याचार का जीवंत चित्रण किया गया. द लीड फाउंडेशन के कलाकारों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से बताया कि डायन प्रथा एक गंभीर सामाजिक कुप्रथा है, जिसे शिक्षा, जागरूकता और कानूनी जानकारी से समाप्त किया जा सकता है. इस दौरान ग्रामीणों से अंधविश्वास से दूर रहने, महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा को प्राथमिकता देने की जानकारी दी गयी.
लोगों में जागरूकता जरूरी
द लीड फाउंडेशन के चीफ एग्जीक्यूटिव सुधांशु कुमार ने कहा कि डायन प्रथा/विच हंटिंग के नाम पर हिंसा (डायन बताकर उत्पीड़न) को रोकने के लिए कड़े कानून के साथ शिक्षा, लैंगिक संवेदनशीलता और सामुदायिक जागरूकता बेहद जरूरी है, ताकि इस अमानवीय प्रथा को जड़ से समाप्त किया जा सके. मौके पर द लीड फाउंडेशन के कलाकार समेत काफी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे.
