माना यह जा रहा है कि नगर निगम में सबकुछ ले-देकर चलने वाला सिस्टम लागू है. स्थिति यह है कि शहर के मुख्य मार्ग का अतिक्रमण हो चुका है और इससे मुख्य सड़कों पर चलना आम और खास लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है. गिरिडीह शहर के बाजार वाले इलाके में मुख्य सड़क पर जितने भी नये भवन बनाये गये हैं या बनाये जा रहे हैं, वे दिन-दहाड़े अवैध निर्माण कर आलीशान भवन खड़ा कर रहे हैं. नगर निगम के अधिकारियों की मिलीभगत ऐसी है कि कई लोगों ने अवैध तरीके से मॉल और होटल तक का भी निर्माण अधिकारियों के नजर के सामने ही कर दिया है.
सेटबैक क्षेत्र छोड़कर ढाई गुणा तक भवन निर्माण की है अनुमति
झारखंड बिल्डिंग बायलॉज के अनुसार फ्लोर एरिया रेसियो झारखंड में अलग-अलग जिले के लिए अलग-अलग निर्धारित है. शहर में रहने वाले आबादी के घनत्व के अनुसार एफएआर यानि फ्लोर एरिया रेसियो निर्धारित होता है. गिरिडीह निगम क्षेत्र में 2.5 एफएआर निर्धारित है. यानि किसी भी प्लॉट में सेटबैक छोड़कर ढाई गुणा तक ही भवन निर्माण की अनुमति है. लेकिन, इसका पालन नहीं किया जा रहा है. गिरिडीह शहर में नगर निगम के अधिकारियों की लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां की अधिकांश आवासीय भवन नक्शा पास होने के बाद भी उसका विचलन कर बनाये जा रहे हैं. ऐसी बात नहीं है कि इन बातों की जानकारी नगर निगम के संबंधित अधिकारियों को नहीं है.गड़बड़ी करने वाले व निगम के अधिकारियों की मिलीभगत का खामियाजा शहर के लोग क्यों भुगतें
गिरिडीह शहर के कई जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ बुद्धिजीवियों और सिविल सोसाइटी के लोगों ने बिल्डिंग बायलॉज के उल्लंघन से संबंधित खबर प्रभात खबर छपने के बाद कहा कि गड़बड़ी करने वाले और निगम के अधिकारियों की मिलीभगत का खामियाजा शहर के लोगों को क्यों भुगतना चाहिए. कहा गया कि शहर के लोग होल्डिंग टैक्स के साथ-साथ निगम के हर तरह के टैक्स का भुगतान करते हैं. इसके अलावा रोड टैक्स भी दिया जाता है. फिर शहर के लोगों की सुविधाओं का ध्यान आखिर कौन रखेगा. इस मामले को लेकर लोगों ने गड़बड़ी कर भवनों का निर्माण करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.चिह्नित कर गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करे निगम : झामुमो
झामुमो के जिलाध्यक्ष और बीस सूत्री के उपाध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि मनमाने तरीके से भवनों के निर्माण होने से शहर के लोगों को परेशानी हो रही है. निजी पार्किंग की व्यवस्था नहीं है. अग्निशमन और एंबुलेंस संचालकों को परेशानी हो रही है. ऐसे में निगम के अधिकारियों को विधि सम्मत कार्रवाई करना ही चाहिए. श्री सिंह ने कहा कि शहर की सूरत बदलनी है, तो अवैध भवन निर्माण करने वाले लोगों को निगम चिह्नित करे. आवश्यकता हो तो जुर्माना करे और बिल्डिंग बायलॉज का अनुपालन सुनिश्चित करे. जाम की समस्या से मुक्ति दिलाने के लिए शहर के लोगों को भी सामाजिक दायित्व निभाना चाहिए.नगर निगम का सिस्टम भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबा है : चुन्नूकांत
गिरिडीह डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के सचिव चुन्नूकांत का कहना है कि नगर निगम का सिस्टम भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबा हुआ है. यदि निगम के अधिकारियों में संजीदगी होती तो, आज ये समस्या देखने को नहीं मिलता. शहर में टैक्स देने वाले लोग ही परेशान हैं. भवनों के निर्माण की प्रक्रिया को नियंत्रित करने वाला सिस्टम ध्वस्त हो चुका है. नक्शा पास करने वाले अधिकारी भी भौतिक सत्यापन कर बिल्डिंग बायलॉज का पालन सुनिश्चित नहीं कर रहे हैं. निगम के अधिकारियों को सख्त होना होगा और एक्ट में निर्धारित प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करना होगा. इसके बाद भी शहर की स्थिति सुधरी होगी.
