प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री को अवगत कराया कि सर्वोच्च न्यायालय सुप्रीम कोर्ट ने सात मई, 2026 को सुनील कुमार यादव बनाम झारखंड सरकार मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. ज्ञापन के अनुसार शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को एक विशेष विज्ञापन जारी करने का स्पष्ट निर्देश दिया है. इसके तहत बिना किसी नयी परीक्षा के, केवल शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर मेरिट लिस्ट तैयार कर शिक्षकों की सीधी नियुक्ति सुनिश्चित करने को कहा गया है.
भविष्य के साथ खिलवाड़ का आरोप
मंत्री से बातचीत के दौरान शिक्षकों ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि वे पिछले 20 वर्षों से राज्य के सुदूर क्षेत्रों में शिक्षा की लौ जला रहे हैं. संघ का तर्क है कि वे एनसीटीइ के सभी मानकों और आरटीइ एक्ट 2009 की सभी योग्यताओं को पूरा करते हैं. राज्य सरकार ने 2016 के बाद से झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जे-टेट) का आयोजन नहीं किया है. ऐसी स्थिति में, सीटेट उत्तीर्ण अध्यापकों को इस विशेष नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल न करना उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा.
मंत्री ने दिया पहल का भरोसा
मुखिया शब्बीर आलम और संघ के पदाधिकारियों ने मंत्री से आग्रह किया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में इन शिक्षकों के समायोजन और नियुक्ति हेतु अविलंब सकारात्मक पहल की जाए. मंत्री ने मांग पत्र और सुप्रीम कोर्ट के न्यायादेश की प्रति का अवलोकन करने के बाद प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि सरकार इस विषय पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी और उचित कदम उठायेगी. मौके पर संघ के प्रदेश स्तर के प्रमुख पदाधिकारी, जिला संयोजक और गिरिडीह समेत विभिन्न जिलों से आये दर्जनों सहायक अध्यापक उपस्थित थे.
