केंद्रीय महिला व बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि झारखंड के छात्र बहुत ही संयमित होकर राज्य सरकार से अपनी मांगों की पूर्ति करने के लिए आंदोलन कर रहे हैं. पिछले 15 दिनों से बारिश व धूप में प्रदर्शन जारी है.
कई बच्चे अनशन में बैठे हुए हैं. राज्य सरकार को चाहिए कि वह इस तरह से युवाओं-विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ ना करे. अगर राज्य सरकार से व्यवस्था में सुधार नहीं हो पा रहा है तो मुख्यमंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए. यह बातें उन्होंने शनिवार को परिसदन में पत्रकारों से कही.
गरीब-मजदूर-किसान के बच्चों का हक मारा जा रहा
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जिस तरह से जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाएं हो रही हैं, उससे ऐसा लगता है कि सीट बेची जा रहीं हैं. छात्रों को उनका अधिकार नहीं मिल रहा है. झारखंड के लोग गरीब, मजदूर, किसान हैं.
वह अपना पेट काटकर बच्चों को पढ़ाते हैं, इस उम्मीद के साथ कि परीक्षा पास करके उनका बच्चा अफसर बनेगा, पर झारखंड सरकार इस पूरे मामले की अनदेखी कर रही है.
परीक्षा की सारा जिम्मा सीएम के पास है
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ब्लैकलिस्टेड कंपनी को परीक्षा का जिम्मा सौंपा गया है. संबंधित कंपनी के लोग खुद परीक्षा पास कर रहे हैं. निश्चित रूप से परीक्षाओं में भारी अनियमितता हो रही है. राज्य सरकार का चुप रहना सही नहीं है.
उन्होंने परीक्षा को रद्द करने की बात कही. इसके साथ ही कहा कि मुख्यमंत्री के पास शिक्षा का जिम्मा भी है. प्रतियोगिता परीक्षा की सारी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री के पास है. मुख्यमंत्री को बच्चों की बातों को सुनकर उसका समाधान करना चाहिए.
दिशाहीन और गैर-जिम्मेदार हैं राहुल गांधी
एक सवाल के जवाब में केंद्रीय मंत्री ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्हें दिशाहीन और गैर-जिम्मेदार बताया. कहा कि वह लगातार सदन की कार्यवाही को बाधित कर रहे हैं.
कभी वह माइक बंद होने की बात कहते हैं, तो कभी किसी अन्य मुद्दे को लेकर सदन में हंगामा होता है. विपक्ष को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखनी चाहिए, पर सदन को बार-बार बाधित करना उचित नहीं है.
