इससे पुल के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है. ग्रामीण बरसात में जब पानी का बहाव तेज होने पर पुल के क्षतिग्रस्त होने की आशंका जता रहे हैं. बालू खनन के कारण पिलरों के क्षतिग्रस्त होने की आशंका बढ़ती जा रही है.
कार्रवाई नहीं होने से बढ़ा मनोबल
बालू के अवैध उठाव पर प्रखंड स्तर पर टास्क फोर्स का गठन किया गया है, लेकिन फोर्स का ध्यान भी इस ओर नहीं गया है. इससे बालू उठाव करने वाले ट्रैक्टर संचालकों की मनमानी बढ़ गयी है. यहां से बालू का उठाव कर बेंगाबाद के विभिन्न प्लांटों में धड़ल्ले से खपाया जा रहा है. खास बात है कि बालू का उठाव करने के बाद ट्रैक्टर संचालक एनएच होकर बालू प्लांटों में पहुंचते हैं. बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही है.
प्रशासन पर का गतिविधि पर रखी जाती है नजर
बता दें कि ट्रैक्टर संचालक प्रशासन की गतिविधि पर नजर रखने के लिए नदी से लेकर दुधीटांड़ मोड़ और थाना व अंचल के गेट के पास सक्रिय रहते हैं. प्रशासन की गाड़ी निकलने और उसके मार्ग की पल-पल की रिपोर्ट एक दूसरे संचालक तक पहुंचायी जाती है. कभी कभार उक्त मार्ग पर प्रशासन का वाहन जाता है, तो सूचना लीक होने के कारण कोई सफलता नहीं मिल पाती है. शीघ्र प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाया गया तो नदी पर बना पुल के क्षतिग्रस्त हो जायेगा, जिससे कई पंचायतों के लोगों को आवाजाही में परेशानी होगी. ग्रामीणों ने सीओ के इसकी जानकारी देकर कार्रवाई की मांग की है.
समय-समय पर होती है छापेमारी : थानेदार
इधर, थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि समय-समय पर छापेमारी की जाती है. सीओ का जब निर्देश होगा, तब छापेमारी की जायेगी.
