बुनियादी सुविधाओं को तरसता बिरगांव

पीरटांड़ प्रखंड के इस गांव में नहीं पहुंची विकास की किरण इंदिरा आवास तो बन गये, पर लाभुकोंकाे पता नहीं पीरटांड़. आजादी के 70 साल बाद भी कड़को पंचायत की बिरगांव में विकास की किरण नहीं पहुंची है. उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र पीरटांड़ प्रखंड का यह गांव गिरिडीह व धनबाद जिले की सीमा पर स्थित है. […]

पीरटांड़ प्रखंड के इस गांव में नहीं पहुंची विकास की किरण
इंदिरा आवास तो बन गये, पर लाभुकोंकाे पता नहीं
पीरटांड़. आजादी के 70 साल बाद भी कड़को पंचायत की बिरगांव में विकास की किरण नहीं पहुंची है. उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र पीरटांड़ प्रखंड का यह गांव गिरिडीह व धनबाद जिले की सीमा पर स्थित है.
स्थानीय ग्रामीण शिवलाल हांसदा, निरुलाल मरांडी, गणेश मुर्मू, अजय बेसरा, टेकलाल राय, कलीराम मरांडी आदि बताते हैं कि यहां कई प्रकार की समस्याएं है. शिक्षा का हाल तो और खराब है. सड़क ऐसी कि दो पहिया वाहन भी आना मुश्किल है. पानी की किल्लत बरकरार रहती है. कई लोगों के नाम इंदिरा आवास तो बन गये, पर लाभुकों काे पता नहीं है. स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जब उनलोगों ने स्थानीय मुखिया के पास इंदिरा आवास दिलाने की गुहार लगायी तब पता चला कि इस गांव के चार लोगों के नाम इंदिरा आवास की स्वीकृति दी जा चुकी है. कहा कि कि पीरटांड़ के अन्य गांवों में काफी विकास हो रहे हैं. रोज नयी-नयी सड़कें बन रही हैं, लेकिन पारसनाथ की तलहटी में बसे इस गांव में विकास की किरण नहीं पहुंच रही है. बिशू मांझी का कहना है कि उनका घर ध्वस्त हो चुका है. वह दूसरे के घरों में रहकर दिन काट रहे है. इधर हरलाडीह स्थित सीआरपीएफ कैंप के कमांडेंट अमित सिंह ने कहा कि बिरगांव काफी उपेक्षित है. यहां रास्ता का घोर अभाव है. इस तरह के इलाके का विकास होना बहुत जरूरी है. कम से कम सड़क बन जाये, तो काफी सहूलियत होगी.

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