डिजिटल इंडिया का दौर दवा व्यवसाय के क्षेत्र में अलग तरह का संकट ला रहा है. ऑनलाइन लाइसेंसिंग से दुकानों को फार्मासिस्ट की घोर किल्लत होगी. एक फार्मासिस्ट के नाम से एक दुकान के पंजीकृत होने के बाद दूसरे प्रतिष्ठान का लाइसेंस उसके नाम से निर्गत नहीं हो पायेगा.
इस संकट से गिरिडीह जिला की 400 दुकानें प्रभावित होंगी. राज्य में अध्ययन की मौजूदा व्यवस्था के तहत इस कमी को शीघ्र पूरा कर पाना संभव नहीं.
गिरिडीह. खुदरा दवा दुकान के लिए लाइसेंसिंग की व्यवस्था ऑनलाइन हुई तो जिला की करीब 400 दवा दुकानें मुश्किल में पड़ जायेंगी. केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया अभियान के तहत सभी व्यवस्था आनलाइन करने पर जोर दिया जा रहा है. 200 सौ फार्मासिस्ट और 600 सौ दवा दुकानों के जिला में ऑनलाइन लाइसेंसिंग चालू होने से 400 दुकानों को फार्मासिस्ट नहीं मिलेंगे. संकट है कि बिना फार्मासिस्ट के इनका नवीकरण कैसे होगा.
खुदरा दवा विक्रेताओं के होश उड़े : खुदरा दवा दुकानदारों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत है कि डिजिटलाइजेशन के अभियान से ये अछूते नहीं रहेंगे. 31 दिसंबर के बाद दवा दुकानों का ऑनलाइन नवीकरण होगा. नयी व्यवस्था के बाद अब लाइसेंस हासिल करने में फर्जीवाड़ा किसी कीमत पर नहीं चलेगी.
जानकारी के अनुसार खुदरा दवा दुकान के लिए फार्मासिस्ट के नाम पर लाइसेंस निर्गत किया जाता है. प्रचलित व्यवस्था में एक फार्मासिस्ट के नाम से कई-कई दुकानें संचालित होती थीं. हालांकि एक फार्मासिस्ट के नाम से एक ही दवा दुकान संचालन का प्रावधान था. अब बदलते दौर में सभी सिस्टम बदल रहा है. अब जब ऑनलाइन व्यवस्था की बात की जा रही है तो खुदरा दवा व्यवसायियों के होश उड़े हुए हैं. सबसे बड़ी मुसीबत यह है कि इतनी संख्या में दवा दुकानें बंद हुईं तो आमलोगों की बड़ी फजीहत होगी.
