प्रतिनिधि, गढ़वा सदर अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) संजय कुमार ने मंगलवार की रात क्षेत्र में बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं और बालू की तस्करी पर संज्ञान लेते हुए औचक गश्ती अभियान चलाया. बता दें अवैध परिचालन को इसके कारण हो रही दुर्घटनाओं को लेकर प्रभात खबर के मंगलवार के अंक में खबर प्रकाशित की गयी थी, जिसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई की. एसडीएम ने खुद मोर्चा संभालते हुए देर रात छापेमारी की और अवैध बालू परिवहन में शामिल तीन ट्रैक्टरों को रंगे हाथ दबोचा. पकड़े गये वाहनों में पतरिया डुमरिया निवासी मुकेश तिवारी का एक बालू लदा ट्रैक्टर शामिल है. वहीं, दो अन्य ट्रैक्टर सुनील जायसवाल (निवासी छतरपुर) और मनीष पांडेय के हैं. कार्रवाई की भनक लगते ही बाकी दोनों ट्रैक्टरों के चालक बीच सड़क पर ही बालू गिराकर और वाहन मोड़कर भागने का प्रयास कर रहे थे, जिन्हें खदेड़कर पकड़ा गया. एसडीएम संजय कुमार ने बताया कि ये तीनों ट्रैक्टर मालिक पहले भी बालू चोरी के मामलों में दोषी पाये जा चुके हैं. बार-बार चेतावनी देने के बावजूद ये अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे थे. इनका यह कृत्य सड़क सुरक्षा और विधि-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन चुका था. जिस कारण इन्हें ””””आदतन दोषी”””” मानते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 110 के तहत कार्रवाई करते हुए गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा रहा है. इसके अलावा इन पर नियम संगत भारी जुर्माना लगाया जायेगा. जुर्माना नहीं देने की स्थिति में प्रशासन नीलाम पत्र वाद (सर्टिफिकेट केस) दायर कर संपत्ति कुर्क करने जैसी सख्त कार्रवाई करेगा. एसडीएम ने कहा कि देर रात तेज रफ्तार में दौड़ रहे बालू लदे ट्रैक्टर केवल अवैध खनन का मामला नहीं हैं. यह आम नागरिकों की जान-माल, सुरक्षा और विधि-व्यवस्था से जुड़ा गंभीर विषय है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जायेगा.
फोर लेन बाइपास पर रातभर अनियंत्रित गति से दौड़ने वाले ट्रैक्टरों से लगातार हो रहे हादसों को देखते हुए एसडीएम ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया है.उन्होंने संबंधित टोल प्लाजा प्रबंधन को बीते चार रातों की सीसीटीवी फुटेज अविलंब उपलब्ध कराने का कड़ा निर्देश दिया है. फुटेज की जांच कर इस पूरे अवैध नेटवर्क, सिंडिकेट और इसमें शामिल अन्य वाहनों की पहचान कर उनके खिलाफ चौतरफा कार्रवाई की जायेगी. एसडीएम ने कहा कि स्थानीय लोगों और ट्रैक्टर मालिकों से मिल रहे फीडबैक के आधार पर इस पूरे रैकेट की एक गोपनीय रिपोर्ट तैयार कर उपायुक्त को सौंपी जायेगी.
