प्रतिनिधि गढ़वा डंडा प्रखंड के अस्तित्व पर संकट को लेकर क्षेत्र की जनता में गहरा आक्रोश व्याप्त है. उपायुक्त द्वारा डंडा प्रखंड को प्रशासनिक व वित्तीय दृष्टिकोण, राजस्व उगाही तथा मापदंडों के अभाव का हवाला देते हुए प्रखंड व अंचल को समाप्त करने की अनुशंसा किये जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया गया है. इस निर्णय से डंडा प्रखंडवासी मर्माहत हैं और इसे लोकतांत्रिक भावना के विरुद्ध मान रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि डंडा प्रखंड लगभग 20 वर्षों से संचालित है, जिस पर करोड़ों रुपये खर्च कर प्रखंड भवन, अंचल कार्यालय, थाना, बैंक सहित अन्य प्रशासनिक ढांचे विकसित किए गए हैं. ऐसे में प्रखंड को समाप्त करने की बात समझ से परे है. जनता ने सवाल उठाया कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है या केवल प्रशासनिक दृष्टिकोण. डंडा प्रखंडवासियों ने उपायुक्त से मांग की है कि यदि वे जनता के प्रति संवेदनशील हैं तो क्षेत्र में निर्मित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय को शीघ्र चालू कराया जाये. वर्तमान में यहां की बच्चियां गढ़वा और पचपड़वा स्थित कस्तूरबा विद्यालयों में पढ़ने को मजबूर हैं, जो अत्यंत कष्टदायक है.इसी मुद्दे को लेकर डंडा में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई. जिसमें सर्वसम्मति से 81 सदस्यीय डंडा प्रखंड बचाओ संघर्ष समिति का गठन किया गया. समिति के अध्यक्ष कालीचरण मेहता, उपाध्यक्ष कामेश्वर चौधरी, सचिव चंदन चौधरी, सह सचिव नंदू चौधरी तथा कोषाध्यक्ष अनिल चौधरी को बनाया गया.बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि 30 जनवरी को हजारों की संख्या में लोग प्रखंड बचाओ मार्च निकालेंगे और प्रखंड कार्यालय पहुंचकर बीडीओ के माध्यम से मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपेंगे. बैठक की अध्यक्षता डंडा मुखिया रूपा देवी ने की.डंडा की जनता ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रखंड के अस्तित्व की रक्षा के लिए वे अंतिम दम तक संघर्ष करेंगे और किसी भी कीमत पर इसे समाप्त नहीं होने देंगे.
डंडा प्रखंड के अस्तित्व को बचाने के लिए जनता ने कसी कमर, करो-मरो का होगा आंदोलन : कालीचरण
डंडा प्रखंड के अस्तित्व पर संकट को लेकर क्षेत्र की जनता में गहरा आक्रोश व्याप्त है.
