भगवान बिरसा के विचार झारखंड की आत्मा में बसते हैं

भगवान बिरसा के विचार झारखंड की आत्मा में बसते हैं

गढ़वा.

समाहरणालय परिसर स्थित बिरसा मुंडा पार्क में सोमवार को आदिवासी समाज के क्रांतिकारी और जननायक धरती आबा बिरसा मुंडा की 124वीं पुण्यतिथि श्रद्धा और सम्मान के साथ मनायी गयी. मौके पर पूर्व मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर ने भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर नमन किया और उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें राष्ट्र का प्रेरणास्रोत बताया. कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए अंग्रेजों के खिलाफ जो आंदोलन छेड़ा, वह सिर्फ एक विद्रोह नहीं बल्कि एक चेतना, एक क्रांति थी. उलगुलान के नाम से प्रसिद्ध इस आंदोलन ने आदिवासी समाज में जागरूकता की नयी लहर पैदा की. उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा ने कम उम्र में ही यह साबित कर दिया था कि सच्चा संघर्ष उम्र नहीं, संकल्प देखता है. पूर्व मंत्री ने कहा कि बिरसा मुंडा के अदम्य साहस और संघर्ष से अंग्रेजी सरकार इतनी घबरा गयी थी कि उन्होंने बिरसा मुंडा को पकड़वाने के लिए 500 रुपये का इनाम घोषित किया था, जो उस समय एक बड़ी राशि मानी जाती थी. इतना ही नहीं, अंग्रेजों ने उन्हें कैद कर यातनाएं दीं और अंततः रांची जेल में रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गयी. लेकिन उनका विचार, उनका संघर्ष आज भी जीवित है और झारखंड की आत्मा में बसता है. उन्होंने कहा कि झारखंड की वर्तमान सरकार बिरसा मुंडा के सपनों को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है. आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा, वनाधिकार कानून का सही क्रियान्वयन, स्थानीय युवाओं को रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार सरकार की प्राथमिकता में है.

उपस्थित लोग : मौके पर झामुमो के जिलाध्यक्ष, शम्भू राम, सचिव, शरीफ अंसारी, केन्द्रीय समिति सदस्य, तनवीर आलम खान, सदस्य, मनोज ठाकुर, कोषाध्यक्ष, चन्दन जायसवाल, रेखा चौबे,अराधना सिंह, परेश तिवारी, कंचन साहू, संजय चौधरी, केश्वर भुईयां, रसीद अंसारी, राजेश गुप्ता, सुनिल गौतम, नीलू खान, भोलू, साबीर, बब्लू दुबे, लक्ष्मी विश्वकर्मा व सरफराज खान सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित थे.

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