गढ़वा में भी बढ़ रहा डॉग लवर्स का क्रेज

इंसान के सबसे वफादार साथी कुत्ते को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय डॉग दिवस

इंसान के सबसे वफादार साथी कुत्ते को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय डॉग दिवस जितेंद्र सिंह, गढ़वा

26 अगस्त को पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय डॉग दिवस मनाया जाता है. यह दिन इंसान के सबसे वफादार साथी कुत्ते को सम्मान देने के साथ-साथ उनके अधिकारों और जरूरतों पर ध्यान दिलाने का अवसर है. इसकी शुरुआत 2004 में पशु कल्याण कार्यकर्ता कोलीन पैज ने की थी. गढ़वा जैसे छोटे शहर में भी अब पालतू कुत्तों का शौक तेजी से बढ़ रहा है. शहर में करीब 250 से 300 परिवार ने कुत्ता पाला है और नियमित रूप से अपने कुत्तों की देखभाल करते हैं. साथ ही उन पर हजारों रुपये खर्च करते हैं. पहले जहां गांवों में केवल देसी नस्ल के कुत्ते पाले जाते थे, वहीं अब रॉटवेलर, जर्मन शेफर्ड, लैब्राडोर, डोबरमैन, बुलडॉग, पग और पामेलियन जैसे विदेशी नस्लों की मांग बढ़ी है. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया. शुरू में कोर्ट ने आदेश दिया था कि स्ट्रीट डॉग्स को पकड़कर शेल्टर होम में रखा जाये. लेकिन देशभर के डॉग लवर्स के विरोध के बाद इस आदेश में संशोधन किया गया. अब कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आवारा कुत्तों का बंध्याकरण और टीकाकरण करने के बाद उन्हें उनके स्थान पर ही छोड़ा जायेगा. यह फैसला उन लोगों के लिए राहत है जो मानते हैं कि आवारा कुत्ते भी इंसानी संवेदना और देखभाल के हकदार हैं.

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कुत्तों से जुड़ा नया बाजार भी खुला

गढ़वा में पालतू कुत्तों की बढ़ती संख्या ने एक नया बाजार भी खड़ा कर दिया है. अब यहां कुत्तों के खाने-पीने का सामान, दवाइयां, शैम्पू, खिलौने और एक्सेसरीज आसानी से मिल जाते हैं. कई लोग नस्लीय पपी बेचकर भी व्यवसाय कर रहे हैं.

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सुरक्षा के साथ तनाव व अकेलेपन को भी दूर करते हैं कुत्ते

कुत्ते न सिर्फ घर की सुरक्षा करते हैं, बल्कि तनाव और अकेलेपन को भी दूर करते हैं. आपदा प्रबंधन और आतंकवाद विरोधी अभियानों में भी उनकी भूमिका अहम रही है. वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि कुत्ते इंसानी भावनाओं को समझते हैं और मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर डालते हैं.

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निस्वार्थ प्रेम सिखाते हैं कुत्तें

अंतरराष्ट्रीय डॉग दिवस हमें यह सिखाता है कि कुत्ते सिर्फ पालतू जानवर नहीं, बल्कि परिवार का हिस्सा हैं. वे हमारे साथ भावनात्मक रिश्ता बनाते हैं और हमें निस्वार्थ प्रेम सिखाते हैं. ऐसे में उनकी देखभाल, अधिकारों और सुरक्षा की जिम्मेदारी भी हमारी ही है.

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गढ़वा के डॉग लवर्स की कहानी

जय प्रकाश ने अपने कुत्ते मौली के नाम पर खोला पेट शॉप (फोटो)डॉग लवर में से एक गढ़वा के जय प्रकाश गुप्ता का पालतू कुत्ता कोरोना के समय पार्बोवायरस से ग्रसित हो गया था. इस ग्रसित होने के बाद कुत्तों के बचने की उम्मीद कम होती हैं. जयप्रकाश उसे इलाज के लिए तब रांची ले गये. महिनों रांची रहकर उसका इलाज कराया, जिससे मौली ठीक हो गया. इसके बाद जयप्रकाश ने गढ़वा में 5 साल पहले अपने कुत्ते के नाम पर मौली पेट शॉप खोल दिया, ताकि उन्हें जो परेशानी हुई वह दूसरे किसी डॉग लवर को न हों.

परिवार के सदस्य की तरह है पालतू कुत्ता: रोहित (फोटो)

गढ़वा सजना निवासी के रोहित कश्यप के पास पवेलियन डॉग है. उन्होंने बताया कि पालतू कुत्ता उनके घर में एक पशु की तरह नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह है. जैसे परिवार के सदस्यों की चिंता की जाती है बैसे की उसकी भी चिंता की जाती है.

घर की बढ़ती हैं रौनक : अमित (फोटो)

गढ़वा के अमित कुमार कश्यप ने कहा कि तीन साल पहले वह अपने घर लुसी (पालतू कुत्ता) को लेकर आये थे. तब से लुसी हम लोगों के घर की जान है. सुरक्षा के अलावा लुसी के रहने से घर की रौनक भी बढ़ गयी है. घर के सदस्य भी लुसी का काफी ध्यान रखते हैं.

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By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

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