अवैध अल्ट्रासाउंड क्लिनिक पर करें कार्रवाई : डीसी

अवैध अल्ट्रासाउंड क्लिनिक पर करें कार्रवाई : डीस

गढ़वा. उपायुक्त शेखर जमुआर की अध्यक्षता में जिला सलाहकार कमेटी की बैठक आयोजित की गयी. बैठक में सिविल सर्जन गढ़वा डॉ अशोक कुमार ने पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट पर प्रेजेंटेशन के माध्यम से संक्षिप्त जानकारी दी. इस दौरान मुख्य रूप से गढ़वा जिले में सेक्स रेशियो, अल्ट्रासाउंड क्लीनिक/सेंटर, पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट के तहत रजिस्टर्ड क्लिनिक, पिछले बैठक में लिये गये निर्णय का अनुपालन, नये अल्ट्रासाउंड केंद्र के लिए प्राप्त आवेदन एवं रिन्यूअल को लेकर कमेटी ने विचार विमर्श किया. उपायुक्त ने गढ़वा जिले में अनधिकृत रूप से बिना लाइसेंस के संचालित क्लिनिक के विरुद्ध कार्रवाई का निर्देश दिया. बैठक में क्लिनिक के लाइसेंस के लिए आये आवेदन की भी जानकारी दी गयी. उपायुक्त ने सभी आवश्यक दस्तावेज एवं पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट के तहत अर्हता रखनेवालों को ही लाइसेंस निर्गत करने का निर्देश दिया. बैठक में वैसे अल्ट्रासाउंड सेंटर जिनके लाइसेंस की अवधि पूर्ण हो गयी है, उन्हें लाइसेंस रिन्यूअल के लिये आवेदन करने का निर्देश दिया गया. उपायुक्त ने कहा कि बिना लाइसेंस रिन्यूअल के अल्ट्रासाउंड सेंटर का संचालन न हो, यह सुनिश्चित कराया जाये. केंद्र के बाहर डॉक्टर का नाम, मोबाइल नंबर एवं फोटो लगाना अनिवार्य बैठक में सिविल सर्जन ने पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट के तहत नियमों में हुए कुछ बदलाव की जानकारी देते हुए कहा कि नये नियम के अनुसार केंद्र के बाहर डॉक्टर का नाम, मोबाइल नंबर एवं फोटो लगवाना अनिवार्य है. साथ ही केंद्र के बाहर यहां लिंग परीक्षण नहीं होता है- से संबंधित एक बोर्ड लगाना भी जरूरी है. उपायुक्त ने वैसे केंद्र जो नियमों का अनुपालन नहीं कर रहे, उन्हें दो बार नोटिस देते हुए अविलंब सील करने को कहा गय. सिविल सर्जन ने गढ़वा जिले में अब तक कुल 14 अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर प्राथमिकी दर्ज करने एवं सील करने की जानकारी दी. मौके पर एकीकृत रोग निगरानी परियोजना व एकीकृत स्वास्थ्य सूचना प्लेटफ़ॉर्म की भी बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गये. इसके तहत मलेरिया, टाइफाइड, डेंगू जैसी बीमारियों के होने का कारण एवं इसके निराकरण पर चर्चा हुई. वहीं इनकी रोकथाम, इलाज व बचाव के लिए संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गये. उपस्थित लोग: बैठक में उपरोक्त पदाधिकारियों के अतिरिक्त उप विकास आयुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा, कार्यपालक पदाधिकारी नगर परिषद गढ़वा सुशील कुमार, जिला शिक्षा पदाधिकारी कैसर रजा, डीडीएम सुजीत कुमार मुंडा एवं अन्य संबंधित विभागों के चिकित्सा पदाधिकारी मौजूद थे.

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नगर निकाय चुनाव में नहीं चला विधानसभा का गणितगढ़वा नगर परिषद चुनाव में भाजपा, झामुमो, कांग्रेस व राजद को उम्मीद से कम मिले मत- अध्यक्ष पद पर निर्दलीय प्रत्याशी की जीत ने चौंकाया- पिछले मत प्रतिशत को बरकरार नहीं रख सके बड़े दलपीयूष तिवारी, गढ़वागढ़वा नगर परिषद चुनाव संपन्न होने के बाद प्रत्याशियों को मिले मतों और उनके जीत-हार के समीकरणों की चर्चा शहर के नुक्कड़ों और चौक-चौराहों पर तेज हो गयी है. बिना किसी दल और बड़े नेताओं के समर्थन के दौलत सोनी की अध्यक्ष पद पर जीत ने सभी को चौंका दिया है. इस चुनाव में झामुमो, कांग्रेस, राजद और भाजपा जैसे बड़े दलों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी. लेकिन परिणामों ने इन दलों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. करीब 15 महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में इन दलों को जो मत मिले थे, उन्हें वे अपने समर्थित प्रत्याशियों के माध्यम से बरकरार नहीं रख सके. सबसे खराब स्थिति भाजपा की रही है. विधानसभा चुनाव 2024 में भाजपा शहर के 33 बूथों में से 30 बूथों पर पहले स्थान पर रही थी. शहरी क्षेत्र से पार्टी को 15 हजार से अधिक मत प्राप्त हुए थे. इसके विपरीत नगर निकाय चुनाव में भाजपा के अध्यक्ष पद की प्रत्याशी कंचन जायसवाल को मात्र 2582 मत मिले. यदि भाजपा के बागी प्रत्याशी अलखनाथ पांडेय को मिले 2701 मत भी जोड़ दिये जाएं, तो कुल आंकड़ा लगभग 5300 तक ही पहुंचता है. यह संख्या विधानसभा चुनाव में मिले मतों की तुलना में काफी कम है.पिछले निकाय चुनाव के मत भी नहीं बचा सकी भाजपावर्ष 2018 के नगर निकाय चुनाव में अलखनाथ पांडेय की पत्नी मीरा पांडेय ने भाजपा के टिकट पर उपाध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा था. उन्हें 6899 मत मिले थे. वहीं निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उपाध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ने वाले विनोद जायसवाल (2026 में भाजपा समर्थित प्रत्याशी कंचन जायसवाल के पति) को 3810 मत प्राप्त हुए थे. वर्तमान चुनाव में ये दोनों ही परिवार अपने पुराने प्रदर्शन को दोहरा नहीं सके. न तो विधानसभा चुनाव में मिले मतों को बरकरार रख पाये और न ही पिछले निकाय चुनाव के आंकड़े तक पहुंच सके.झामुमो और कांग्रेस का गठजोड़ भी नहीं दिला सका जीतगढ़वा नगर परिषद चुनाव में झामुमो ने संतोष केसरी को अपना समर्थित प्रत्याशी बनाया था. कांग्रेस ने भी उन्हें समर्थन दिया. दो बड़े दलों के समर्थन के बावजूद संतोष केसरी को मात्र 3790 मत प्राप्त हुए. वर्ष 2018 के निकाय चुनाव में महिला आरक्षित सीट होने के कारण संतोष केसरी की पत्नी पिंकी केसरी अध्यक्ष पद की प्रत्याशी थीं. तब उन्हें 6411 मत मिले थे और वे भाजपा प्रत्याशी थीं. उसी चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी कमर सफदर को केवल 420 मत प्राप्त हुए थे. दोनों दलों को उम्मीद थी कि संयुक्त रूप से वे करीब सात हजार मत प्राप्त कर संतोष केसरी को जीत दिला देंगे. लेकिन यह रणनीति सफल नहीं हो सकी.54 मतों से हारने वाली अनिता दत्ता को इस बार केवल 215 मतवर्ष 2018 के नगर परिषद चुनाव में झामुमो की प्रत्याशी अनिता दत्ता को 6357 मत मिले थे. वे मात्र 54 मतों के अंतर से पिंकी केसरी से हार गयी थीं. इस बार अनिता दत्ता को किसी दल का समर्थन नहीं मिला और वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरीं. लेकिन उन्हें केवल 215 मतों से ही संतोष करना पड़ा.राजद भी पिछला प्रदर्शन दोहराने में विफलनगर परिषद चुनाव 2026 में राजद ने विकास माली को समर्थन दिया. विकास माली को 1222 मत प्राप्त हुए. जबकि वर्ष 2018 के चुनाव में राजद समर्थित प्रत्याशी मनिका नारायण को 5117 मत मिले थे. वहीं उपाध्यक्ष पद के लिए राजद प्रत्याशी मो शमीम को 2018 में 3728 मत प्राप्त हुए थे. कुल मिलाकर नगर परिषद चुनाव के नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस बार मतदाताओं ने दलों की बजाय प्रत्याशियों को प्राथमिकता दी. बड़े दलों की रणनीति और पुराने मत प्रतिशत इस चुनाव में कारगर साबित नहीं हुए.

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