गढ़वा से अविनाश सिंह की रिपोर्ट
Garhwa News: कहते हैं कि खाकी सिर्फ कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं होती, बल्कि जब पुलिसकर्मी सेवा और मानवता को अपना धर्म बना लें, तो वे लोगों के लिए फरिश्ता बन जाते हैं. इन दिनों झारखंड के गढ़वा जिले में तैनात पुलिस जवान सुमेर चौधरी की कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है. लोग उन्हें प्यार से ‘सुमेर पुलिसवाला’ कहकर बुला रहे हैं.
ड्यूटी के बाद हाईवे पर लोगों की जान बचाते हैं सुमेर चौधरी
झारखंड पुलिस में कार्यरत सुमेर चौधरी अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद बचा हुआ समय हाईवे पर लोगों की जान बचाने में लगा रहे हैं. उनके इसी जज्बे और जागरूकता के कारण नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचआई) को भी कार्रवाई करनी पड़ी और एक बड़ा खतरा टल गया.
टूटे ड्रेनेज से हो रहे थे लगातार हादसे
मामला गढ़वा के नेशनल हाईवे पर स्थित लगमा पेट्रोल पंप के पास का है. बघौता अंडरपास से पश्चिम दिशा की ओर जाने वाले रास्ते में एक ड्रेनेज बुरी तरह टूट चुका था. इस कारण वहां से गुजरने वाले बाइक, ऑटो और कार चालक लगातार दुर्घटना का शिकार हो रहे थे. स्थानीय लोगों के अनुसार आए दिन लोग वहां गिरकर घायल हो रहे थे. खासकर रात के समय यह स्थान ‘डेथ ट्रैप’ बन चुका था. हालांकि शुरुआत में सुमेर चौधरी को इस समस्या की जानकारी नहीं थी.
एक फोन कॉल के बाद सक्रिय हुए सुमेर
सुमेर चौधरी को एक जागरूक नागरिक ने फोन कर इस खतरनाक स्थिति की जानकारी दी. सूचना मिलते ही वह तुरंत मौके पर पहुंचे और पूरे इलाके का वीडियो बनाया. इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर सीधे एनएचआई को टैग किया. वीडियो तेजी से वायरल होने लगा और देखते ही देखते हजारों लोगों तक पहुंच गया. सोशल मीडिया पर लोगों ने प्रशासन और एनएचआई से तत्काल कार्रवाई की मांग शुरू कर दी.
12 घंटे के भीतर ठीक हुआ ड्रेनेज
सुमेर चौधरी की पहल का असर यह हुआ कि एनएचआई की टीम हरकत में आ गई. वायरल वीडियो और लगातार बढ़ते दबाव के बाद संबंधित अधिकारियों ने महज 10 से 12 घंटे के भीतर टूटे हुए ड्रेनेज की मरम्मत करवा दी. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते यह काम नहीं होता, तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता था. लोगों ने सुमेर चौधरी की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने आम नागरिक की तरह नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार प्रहरी की तरह काम किया.
ड्यूटी के बाद भी निभा रहे जिम्मेदारी
फिलहाल सुमेर चौधरी की ड्यूटी गढ़वा कोर्ट में मॉर्निंग शिफ्ट में लगी हुई है. लेकिन उनकी पहचान सिर्फ एक पुलिसकर्मी तक सीमित नहीं रह गई है. ड्यूटी खत्म होने के बाद जहां अधिकांश लोग आराम करना पसंद करते हैं, वहीं सुमेर हर दिन शाम 4 बजे से 6 बजे तक हाईवे पर पहुंच जाते हैं. उनका मकसद सिर्फ इतना है कि लगमा पेट्रोल पंप और बघौता अंडरपास के आसपास होने वाले सड़क हादसों को रोका जा सके. वह वहां खड़े होकर लोगों को सही दिशा बताते हैं और वाहन चालकों को सावधानी बरतने के लिए जागरूक करते हैं.
एक जान भी बची तो सौभाग्य होगा: सुमेर चौधरी
सुमेर चौधरी का कहना है कि उनका प्रयास किसी प्रचार या प्रसिद्धि के लिए नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर उनके छोटे से प्रयास से किसी एक परिवार के सदस्य की भी जान बच जाती है, तो वह खुद को सौभाग्यशाली मानेंगे. सुमेर ने कहा, ‘मैं नहीं चाहता कि सड़क हादसे में कोई परिवार असमय अपने प्रियजन को खो दे. अगर समय रहते लोगों को सचेत किया जाए, तो कई हादसे रोके जा सकते हैं.’ उनकी यह सोच सोशल मीडिया पर लोगों को काफी प्रभावित कर रही है. लोग उन्हें ‘रियल हीरो’ और ‘मानवता का प्रहरी’ बता रहे हैं.
बघौता अंडरपास अब भी बना खतरा
हालांकि टूटे हुए ड्रेनेज की समस्या का समाधान हो चुका है, लेकिन सुमेर चौधरी के अनुसार असली समस्या अभी भी बघौता अंडरपास के पास बनी हुई है. उनका कहना है कि वहां सड़क का ढांचा वैज्ञानिक तरीके से नहीं बनाया गया है. इस कारण वाहन चालकों में भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है और कई गाड़ियां अनजाने में गलत दिशा में चली जाती हैं. तेज रफ्तार हाईवे पर यह गलती कई बार आमने-सामने की टक्कर और भीषण हादसों की वजह बन रही है.
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हाथ देकर रोकते हैं गाड़ियां
सुमेर चौधरी रोजाना मौके पर मौजूद रहकर वाहन चालकों को ‘रॉन्ग साइड’ में जाने से रोकते हैं. वह हाथ देकर गाड़ियों को रुकवाते हैं और उन्हें सही रास्ते की जानकारी देते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार उन्होंने खुद अपनी जान जोखिम में डालकर वाहन चालकों को दुर्घटना से बचाया है. यही वजह है कि अब सोशल मीडिया पर ‘सुमेर पुलिसवाला’ की चर्चा तेजी से हो रही है. खाकी के इस संवेदनशील और मानवीय चेहरे को देखकर लोग झारखंड पुलिस की भी जमकर सराहना कर रहे हैं.
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