गढ़वा. किसी दुर्घटना के विरोध स्वरूप या किसी मांग को लेकर बलपूर्वक रोड जाम कर सार्वजनिक आवागमन बाधित करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जायेगी. अनुमंडल पदाधिकारी सदर संजय कुमार ने उक्त संबंध में आम लोगों से अनुरोध किया है तथा चेतावनी दी है कि वे सड़क जाम करने की गतिविधियों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन न करें. एसडीओ ने कहा कि गढ़वा में सड़क दुर्घटनाओं के बाद रास्ता को जाम कर देना एक प्रवृत्ति सी बनती जा रही है जिसे हर हाल में रोकना होगा. ऐसी घटनाओं से आवागमन तो अस्त-व्यस्त होता ही है, साथ ही क्षेत्र की कानून व्यवस्था को लेकर भी अवांछित परिस्थिति उत्पन्न हो जाती है. हद तो तब हो जाती है जब सड़क दुर्घटना के शिकार हुए व्यक्ति के शव को सड़क पर अनादर पूर्ण तरीके से रखकर लोग नारेबाजी करने लगते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसा करना न केवल अनैतिक और अमानवीय है, बल्कि घोर निंदनीय भी है. किसी दिवंगत व्यक्ति के शव के साथ गरिमापूर्ण व्यवहार न करना मानव अधिकारों के विरुद्ध एक गैरकानूनी और असामाजिक कृत्य है. जाम में शामिल हो जाते हैं असामाजिक तत्व एसडीओ ने कहा कि अक्सर किसी दुर्घटना के उपरांत हताहत व्यक्ति के परिजन तो आपदा की घड़ी में बेसुध जैसे हो जाते हैं और वे नहीं समझ पाते हैं कि उन्हें क्या करना है क्या नहीं करना है, लेकिन इसका लाभ आसपास के कई अराजक तत्व उठाते हैं और कई बार परिजनों की इच्छा के विरुद्ध भी शव सड़क पर रखकर जाम लगा देते हैं. ऐसे अराजक तत्वों को हतोत्साहित करने के लिए अब कड़ी कार्रवाई करना जरूरी है. संबंधित सीओ और थाना प्रभारी भी होंगे जवाबदेह : ऐसे मामलों में वीडियोग्राफी कराकर सभी के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जायेगी. अनुमंडल क्षेत्र में यदि कहीं भी जानबूझ कर जाम का मामला प्रकाश में आता है तो इससे निपटने के लिए संबंधित अंचल अधिकारी और थाना प्रभारी को भी जवाबदेह माना जायेगा. राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम में हैं कड़े प्रावधान एसडीओ ने बताया कि राजमार्ग को अवरूद्ध करना एक संज्ञेय अपराध है. इसके लिए संबंधित अधिनियम की धारा आठ (बी) के तहत पांच वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है. इसलिए उन्होंने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे कभी भी जानबूझकर हाइवे जाम करने जैसी गैरकानूनी गतिविधियों में संलिप्तता से बचें.
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