एक अफसर, कई विभाग.ठप पड़ा विकास

बीडीओ-सीओ से लेकर सीडीपीओ तक दर्जनों पद खाली, प्रभार में चल रहा कार्य

बीडीओ-सीओ से लेकर सीडीपीओ तक दर्जनों पद खाली, प्रभार में चल रहा कार्य प्रभात खबर टीम,मेदिनीनगर पलामू जिले के विभिन्न प्रखंड व अंचल कार्यालयों में पदाधिकारियों के पद लंबे समय से खाली रहने के कारण प्रशासनिक व्यवस्था चरमरा गयी है. जिले के अधिकांश प्रखंडों में बीडीओ और सीओ जैसे महत्वपूर्ण पद भी नियमित नहीं हैं और प्रभार के भरोसे काम चल रहा है. एक ही पदाधिकारी पर कई-कई विभागों का अतिरिक्त बोझ है, जिससे न सिर्फ विभागीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि विकास योजनाएं भी धीमी पड़ गयी हैं. स्थिति यह है कि किसी एक पदाधिकारी को कल्याण, आपूर्ति, कृषि जैसे विभागों का एक साथ प्रभार सौंप दिया गया है. इस कारण दाखिल-खारिज, जमीन मापी, राशन, कृषि और सामाजिक कल्याण से जुड़े कार्य समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं. आम जनता को प्रखंड-सह-अंचल कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं. इतने बड़े पैमाने पर पद रिक्त रहने से जिले में सरकार के गुड गवर्नेंस पर सवाल खड़े हो रहे हैं. तरहसी : पूरा प्रखंड-अंचल प्रभार के भरोसे तरहसी प्रखंड-सह-अंचल कार्यालय पूरी तरह अतिरिक्त प्रभार पर चल रहा है. बीडीओ कुसुम केरकेट्टा मूल रूप से लेस्लीगंज में पदस्थापित हैं, लेकिन तरहसी में नियमित बीडीओ नहीं होने के कारण उन्हें यहां का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. साथ ही उन्हें बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) का भी प्रभार सौंपा गया है. वे सप्ताह में गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार को तरहसी में बैठते हैं. गौरतलब है कि वर्ष 2008 में तरहसी प्रखंड के मनातू से अलग होने के बाद आज तक यहां कोई नियमित सीडीपीओ की पदस्थापना नहीं हुई है. कभी बीडीओ तो कभी सीओ प्रभार में यह जिम्मेदारी निभाते हैं. प्रखंड में कुल 13 पंचायत हैं, लेकिन पंचायत सचिव के सभी पद खाली हैं. वर्तमान में मात्र आठ पंचायत सेवक और तीन जनसेवक के भरोसे पंचायतों का काम चल रहा है. पंचायत सेवक नागेंद्र पासवान एफसीआइ गोदाम प्रबंधक का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं, जबकि विवेक पांडेय पंचायती राज पदाधिकारी के प्रभार में हैं. अंचल कार्यालय में अंचलाधिकारी मदन सुमन मनातू में सीओ के मूल पद पर रहते हुए बीडीओ और तरहसी सीओ का अतिरिक्त प्रभार देख रहे हैं. अंचल में चार राजस्व कर्मचारियों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन मात्र दो ही कार्यरत हैं. एक सीआइ का पद भी रिक्त है, जिसका प्रभार राजस्व कर्मचारी के पास है. प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी का पद भी प्रभार में चल रहा है. पांडू : अंचल का दर्जा मिला, पर सुविधाएं नहीं 15 अगस्त 2016 को पांडू को अंचल का दर्जा मिला था। उस समय लोगों में उम्मीद जगी थी कि अंचल से जुड़े कार्य अब आसानी से होंगे, लेकिन हकीकत इसके उलट है. प्रखंड-सह-अंचल कार्यालय में अधिकांश पद प्रभार में हैं। मोहम्मदगंज के बीडीओ रणवीर कुमार पांडू के बीडीओ और सीओ दोनों का प्रभार संभाल रहे हैं. अंचलाधिकारी का पद भी प्रभार में है. पांडू अंचल में तीन हल्का हैं, लेकिन मात्र एक ही अंचल निरीक्षक (सीआइ) पदस्थापित हैं. दो क्लर्क के स्थान पर एक क्लर्क कार्यरत है, जबकि चपरासी का पद पूरी तरह खाली है. पूर्व में विश्रामपुर प्रखंड से अंचल का काम होता था, लेकिन अलग अंचल बनने के बाद भी यहां पदस्थापना नहीं होने से अधिकांश अंचल कार्य प्रभावित हो रहे हैं. हुसैनाबाद : अनुमंडल से प्रखंड तक पदों का टोटा हुसैनाबाद अनुमंडल से लेकर प्रखंड-सह-अंचल कार्यालय तक कई महत्वपूर्ण पद वर्षों से रिक्त हैं. अनुमंडल पदाधिकारी ओमप्रकाश गुप्ता के तबादले के बाद एलआरडीसी गौरांग महतो को अनुमंडल पदाधिकारी का प्रभार सौंपा गया है। इसके साथ ही वे जिला भू-अर्जन पदाधिकारी तथा वर्षों से रिक्त निबंधन पदाधिकारी का भी प्रभार संभाल रहे हैं.हुसैनाबाद में निबंधन पदाधिकारी का पद पिछले दस वर्षों से अधिक समय से रिक्त है. जो भी एसडीओ यहां पदस्थापित होते हैं, वही निबंधन पदाधिकारी का कार्य देखते हैं. अनुमंडल कार्यालय में कर्मियों की भी भारी कमी है. इसके अलावा बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी, प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी, बीइइओ और कनीय अभियंता के पद रिक्त हैं. अंचल कार्यालय में भी अंचल निरीक्षक और राजस्व कर्मचारियों की कमी के कारण आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. सतबरवा : दूसरे प्रखंडों के भरोसे चल रहा प्रशासन सतबरवा प्रखंड में बीडीओ का पद करीब एक वर्ष तक प्रभार में चलने के बाद वर्तमान में अंचलाधिकारी कृष्ण मुरारी तिर्की को बीडीओ के पद पर पदस्थापित किया गया है. हालांकि प्रखंड कल्याण पदाधिकारी, खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी और कृषि पदाधिकारी के पद अभी भी प्रभार में हैं. वन विभाग, बाल विकास परियोजना और स्वास्थ्य विभाग का यहां अपना कार्यालय तक नहीं है. इन विभागों की जिम्मेदारी क्रमशः मेदिनीनगर, मनिका और लेस्लीगंज प्रखंड के पदाधिकारियों द्वारा निभायी जा रही है. जबकि सतबरवा प्रखंड की स्थापना को करीब 32 वर्ष हो चुके हैं.

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By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

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