अधर में दानरो नदी तट पर बनने वाली 113 करोड़ की मरीन ड्राइव

शहर के बीचों-बीच बहने वाली दानरो नदी कभी गढ़वा की पहचान मानी जाती थी,

वर्ष 2024 में गढ़वा विधायक सह सूबे के मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर ने भेजा था प्रस्ताव सौंदर्यीकरण, जलजमाव से मुक्ति और नदी पुनर्जीवन की दिशा में की गई थी बड़ी पहल जितेंद्र सिंह गढ़वा शहर के बीचों-बीच बहने वाली दानरो नदी कभी गढ़वा की पहचान मानी जाती थी, लेकिन समय के साथ यह नदी प्रदूषण, अतिक्रमण और उपेक्षा का शिकार होती चली गयी. इसी नदी को नया जीवन देने और शहर को आधुनिक स्वरूप प्रदान करने के उद्देश्य से वर्ष 2024 में दानरो नदी के तट पर मरीन ड्राइव एवं रिवर फ्रंट निर्माण की महत्वाकांक्षी योजना सामने आयी थी. तत्कालीन गढ़वा विधायक सह मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर ने इस परियोजना का प्रस्ताव सरकार को भेजा था. हालांकि बड़े दावों और घोषणाओं के बावजूद आज यह योजना अधर में लटकी हुई दिखाई दे रही है. इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य दानरो नदी का पुनर्जीवन, शहर का सौंदर्यीकरण, ट्रैफिक व्यवस्था को सुदृढ़ करना तथा बरसात के दिनों में होने वाली जलजमाव की समस्या से स्थायी राहत दिलाना था. प्रस्ताव के अनुसार दानरो नदी के दोनों किनारों पर आधुनिक सुविधाओं से युक्त मरीन ड्राइव का निर्माण किया जाना था. योजना के तहत सरसतिया नदी पुल से लेकर कल्याणपुर स्थित समाहरणालय तक नदी किनारे सड़क विकसित करने की बात कही गयी थी. प्रस्तावों में इसकी लंबाई लगभग आठ किलोमीटर तक बतायी गयी थी. परियोजना की अनुमानित लागत अलग-अलग चरणों में 30 करोड़ रुपये से लेकर 140 करोड़ रुपये तक बतायी गयी थी. बाद में इसकी प्रस्तावित लागत लगभग 113 करोड़ रुपये आंकी गई. वहीं शहर के ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए अलग से करीब 65 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनायी गयी थी. प्रशासनिक स्तर पर यह दावा किया गया था कि परियोजना पूरी होने के बाद यह झारखंड का सबसे बड़ा रिवर फ्रंट बन सकता है. शहर को मिलती नयी पहचान प्रस्तावित मरीन ड्राइव के निर्माण से गढ़वा शहर को नयी पहचान मिलने की उम्मीद जतायी गयी थी. यदि यह परियोजना धरातल पर उतरती तो गढ़वा के लोगों को महानगरों की तर्ज पर नदी किनारे घूमने और समय बिताने की सुविधा मिलती. शहर के बीचों-बीच विकसित होने वाला यह रिवर फ्रंट आने वाले समय में स्थानीय पर्यटन का बड़ा केंद्र बन सकता था. जलजमाव की समस्या के समाधान की थी योजना गढ़वा शहर में हर वर्ष बरसात के मौसम में जलजमाव की समस्या गंभीर रूप ले लेती है. इसी समस्या के समाधान के लिए परियोजना में आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने की योजना शामिल की गयी थी. प्रस्ताव के अनुसार नदी किनारे नाले का निर्माण कराया जाना था ताकि शहर का पानी व्यवस्थित तरीके से नदी तक पहुंच सके. साथ ही शहर का गंदा पानी बिना ट्रीटमेंट के सीधे नदी में न गिरे, इसके लिए भी व्यवस्था करने की बात कही गयी थी. अधिकारियों का मानना था कि इससे नदी प्रदूषण में कमी आएगी और शहर को स्वच्छ वातावरण मिलेगा. प्रदूषण और अतिक्रमण बड़ी चुनौती वर्तमान समय में दानरो नदी की स्थिति काफी दयनीय हो चुकी है. शहर का अधिकांश कचरा नदी में फेंका जा रहा है, जिससे नदी लगातार प्रदूषित होती जा रही है. कई स्थानों पर नदी सिकुड़ चुकी है तथा अवैध अतिक्रमण के कारण इसकी प्राकृतिक धारा प्रभावित हुई है. इसके अलावा अवैध बालू उठाव भी नदी के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा बन चुका है. पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाये गये, तो आने वाले वर्षों में दानरो नदी पूरी तरह समाप्त होने की स्थिति में पहुंच सकती है. वैज्ञानिक रिपोर्ट ने बढ़ायी चिंता वैज्ञानिक अध्ययनों और पर्यावरणीय रिपोर्टों में यह तथ्य सामने आया है कि पिछले लगभग 45 वर्षों में दानरो नदी की करीब 69 प्रतिशत जलधाराएं समाप्त हो चुकी हैं. कई स्थानों पर नदी का स्वरूप नाले जैसा हो गया है. गर्मी के दिनों में नदी का अधिकांश हिस्सा सूख जाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सौंदर्यीकरण से समस्या का समाधान संभव नहीं है, बल्कि नदी के वास्तविक पुनर्जीवन के लिए दीर्घकालिक योजना बनानी होगी. इसमें जलस्रोतों का संरक्षण, अतिक्रमण हटाना, प्रदूषण नियंत्रण तथा जल संचयन जैसे उपायों पर गंभीरता से काम करने की आवश्यकता है. योजना पर अब भी टिकी हैं लोगों की उम्मीदें दानरो नदी के किनारे मरीन ड्राइव निर्माण की खबर से शहरवासियों में काफी उत्साह देखा गया था. लोगों को उम्मीद जगी थी कि यदि यह परियोजना पूरी हो जाती तो गढ़वा शहर की तस्वीर बदल जाती. हालांकि वर्तमान में यह परियोजना अधर में लटकी हुई नजर आ रही है, लेकिन अब भी शहरवासियों को उम्मीद है कि सरकार और प्रशासन इस महत्वाकांक्षी योजना को फिर से गति देगा. शहर का विकास होगा : अमित कश्यप (अमित कश्यप की तसवीर) इस संबंध में युवा व्यवसायी अमित कश्यप ने कहा कि शहर में रिवर फ्रंट बनने से लोगों को काफी लाभ मिलेगा और सुंदर शहर की परिकल्पना साकार होगी. उन्होंने कहा कि दानरो नदी के किनारे मरीन ड्राइव बनने से गढ़वा शहर को आधुनिक स्वरूप मिलेगा तथा लोगों के लिए घूमने-फिरने और मनोरंजन की बेहतर सुविधा विकसित होगी. इससे शहर में निवेश और व्यापार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी. शहर को नई पहचान मिलेगी : ज्योति प्रकाश केसरी ( ज्योति प्रकाश् की तसवीर) शहर के निवासी ज्योति प्रकाश केसरी ने कहा कि शहर के बीच से गुजरने वाली दानरो नदी के तट पर भेजे गये प्रस्ताव को जल्द धरातल पर उतरना चाहिए. उन्होंने कहा कि इससे शहर को विकास का नया आयाम मिलेगा. और गढ़वा की नई पहचान स्थापित होगी. उन्होंने कहा कि यदि नदी का सौंदर्यीकरण किया जाता है तो यह आने वाले समय में पर्यटन का आकर्षण केंद्र बन सकता है. तथा शहर के लोग भी स्वच्छ और सुंदर वातावरण का लाभ उठा सकेंगे. विकसित श्रेणी के रूप में स्थापित होगा शहर : राजेश गुप्ता (राजेश गुप्ता की तसवीर) व्यवसायी संघ के अध्यक्ष राजेश गुप्ता ने कहा कि दानरो नदी शहर की लाइफ लाइन है. यदि इस योजना को धरातल पर उतारा जाता है तो इससे विलुप्त होती नदियों को संरक्षित करने का अवसर मिलेगा. और शहर विकसित श्रेणी में शामिल होगा. उन्होंने कहा कि मरीन ड्राइव बनने से गढ़वा में पर्यटन, व्यापार और स्थानीय व्यवसाय को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी. इससे रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे : राघवेंद्र नारायण सिंह (राघवेंद्र नारायण सिंह की तसवीर) गढ़वा जिला क्रिकेट संघ के सचिव सह व्यवसायी राघवेंद्र नारायण सिंह ने कहा कि शहर के बीचोबीच गुजरने वाली दानरो नदी को संरक्षित करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि यदि यह योजना धरातल पर उतरती है तो नदी को अतिक्रमण से बचाया जा सकेगा तथा सैकड़ों लोगों को रोजगार भी मिलेगा. उन्होंने कहा कि रिवर फ्रंट बनने से स्थानीय युवाओं के लिए व्यापार, पर्यटन और छोटे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, जिससे शहर के आर्थिक विकास को गति मिलेगी. शहर के विकास के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित होगी : दौलत सोनी ( बॉक्स- दौलत सोनी की तसवीर) नगर परिषद अध्यक्ष दौलत सोनी ने कहा कि गढ़वा में दानरो नदी के तट पर रिवर फ्रंट एवं मरीन ड्राइव का निर्माण जरूर होना चाहिए. उन्होंने कहा कि यह परियोजना शहर के विकास के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित होगी.उन्होंने कहा कि दानरो नदी के सौंदर्यीकरण के साथ-साथ नदी से सटे बाईपास मार्ग बनने से शहर को जाम की समस्या से काफी हद तक मुक्ति मिल सकती है. इससे आम नागरिकों को आवागमन में सुविधा होगी तथा शहर की ट्रैफिक व्यवस्था भी बेहतर होगी. उन्होंने कहा कि मरीन ड्राइव बनने से गढ़वा शहर को नई पहचान मिलेगी और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. वर्तमान में यह प्रस्ताव सरकार के पास लंबित है. नगर परिषद की ओर से उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार इस महत्वकांक्षी योजना को स्वीकृति देकर जल्द धरातल पर उतारने का काम करेगी.

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By VIKASH NATH

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