केतार से संदीप कुमार की रिपोर्ट
Garhwa News: झारखंड के गढ़वा जिले के केतार प्रखंड कार्यालय में सरकारी कर्मचारियों द्वारा शराब पीकर हंगामा करने का मामला सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है. इस घटना ने सरकारी कार्यप्रणाली और अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. मामले में तीन कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
तीन कर्मचारियों पर कार्रवाई की अनुशंसा
इस पूरे मामले में राजस्व उप निरीक्षक राजेश कुमार त्रिपाठी, जनसेवक नीरज कुमार सिंह और अनुसेवक जितेंद्र उरांव के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की गई है. प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) प्रशांत कुमार ने इन तीनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए उपायुक्त गढ़वा को रिपोर्ट भेजी है.
मेडिकल जांच में शराब सेवन की पुष्टि
प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित कर्मचारियों का मेडिकल टेस्ट कराया. जांच रिपोर्ट में शराब सेवन की पुष्टि पॉजिटिव पाई गई. इसी आधार पर बीडीओ ने कार्रवाई की अनुशंसा को और मजबूत किया है, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि आरोप निराधार नहीं हैं.
मीडिया रिपोर्ट के बाद बढ़ा दबाव
इस घटना को लेकर जब स्थानीय मीडिया में खबर प्रमुखता से प्रकाशित हुई, तो प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया. विधायक प्रतिनिधि सुरेश कुमार, प्रखंड प्रमुख चंद्रावती देवी और जिला परिषद सदस्य ज्वाला प्रसाद ने भी उपायुक्त को पत्र लिखकर दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.
वीडियो बनाने पर ग्रामीण से दुर्व्यवहार का आरोप
ग्रामीण रवि कुमार ने आरोप लगाया है कि जब उन्होंने इस घटना का वीडियो बनाना चाहा, तो संबंधित कर्मचारियों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया. इतना ही नहीं, उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग भी किया गया, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश है.
जान से मारने की धमकी का भी आरोप
रवि कुमार ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद गुरुवार देर रात राजेश कुमार त्रिपाठी और नीरज कुमार सिंह ने उन्हें बार-बार फोन कर जान से मारने की धमकी दी और गाली-गलौज की. इस गंभीर आरोप के बाद मामला और संवेदनशील हो गया है.
थाने में शिकायत, जांच शुरू
पीड़ित रवि कुमार ने केतार थाना में आवेदन देकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
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प्रशासन की साख पर उठे सवाल
इस घटना ने सरकारी कार्यालयों में अनुशासन और जिम्मेदारी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. जिस स्थान पर जनता की समस्याओं का समाधान होना चाहिए, वहीं इस तरह की घटनाएं प्रशासन की छवि को धूमिल करती हैं.
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