गढ़वा: सिर्फ एक दिन में 356 दावों-आपत्तियों ने बढ़ायी मतदाता सूची की हलचल

गढ़वा जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में एक दिन में 356 दावे-आपत्तियां आईं, जिसमें 166 नाम जोड़ने और 190 सुधार के लिए थे.

गढ़वा. मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के तहत गढ़वा जिले में दावे-आपत्तियों का दौर अब अंतिम चरण में पहुंच गया है, लेकिन अंतिम दिनों में भी मतदाताओं की सक्रियता बनी हुई है. 21 सितंबर को जिले में एक ही दिन में 356 आवेदन प्राप्त हुए. इनमें 166 आवेदन नये मतदाता का नाम जोड़ने के लिए तथा 190 आवेदन मतदाता सूची में सुधार के लिए थे. इसके अलावा एक आवेदन नाम हटाने से संबंधित भी प्राप्त हुआ.गढ़वा विधानसभा क्षेत्र में 21 सितंबर को 95 फॉर्म-6 और 142 फॉर्म-8 प्राप्त हुए. वहीं भवनाथपुर विधानसभा क्षेत्र में 71 फॉर्म-6 और 48 फॉर्म-8 जमा किये गये. फॉर्म-7 का एक आवेदन गढ़वा विधानसभा क्षेत्र से आया. इस तरह एक दिन में दोनों विधानसभा क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मतदाताओं ने सूची में नाम जुड़वाने अथवा प्रविष्टियों में सुधार के लिए दावा किया.

अब तक 20,305 नाम जोड़ने के आवेदन

20 सितंबर तक जिले में फॉर्म-6 के 20,305 आवेदन प्राप्त हो चुके थे. इनमें गढ़वा विधानसभा क्षेत्र से 9,692 और भवनाथपुर से 10,613 आवेदन शामिल हैं. 21 सितंबर के 166 आवेदनों को जोड़ने पर यह संख्या 20,471 हो जाती है. इसी तरह फॉर्म-8 के 13,314 आवेदन 20 सितंबर तक प्राप्त हुए थे, जिनमें एक दिन में 190 और आवेदन जुड़े. एसआइआर के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर निर्धारित है. इसके बाद प्राप्त दावे-आपत्तियों का निपटारा 14 अक्तूबर तक किया जाना है. अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 19 अक्तूबर को होगा.

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By Avinash Singh

अविनाश कुमार सिंह प्रभात खबर के गढ़वा ब्यूरो चीफ हैं. वह आंचलिक से लेकर राज्य मुख्यालय तक 27 वर्ष से अधिक की पत्रकारिता का अनुभव रखते हैं. राजनीतिक विश्लेषण, क्राइम रिपोर्टिंग, हाई-प्रोफाइल इंटरव्यू और खोजी पत्रकारिता.में इन्हें महारत हासिल है. अविनाश कुमार सिंह झारखंड की पत्रकारिता और 'प्रभात खबर' के विश्वसनीय चेहरा हैं, जिन्होंने खबरों की गुणवत्ता को हमेशा प्राथमिकता दी है. लगभग तीन दशकों (27 वर्ष) के अपने लंबे सफर में उन्होंने पलामू ब्यूरो प्रमुख के रूप में 10 साल से अधिक समय तक नेतृत्व किया. इसके बाद प्रदेश मुख्यालय (रांची) में काम करते हुए, विशेषकर वर्ष 2024 के चुनावों के दौरान, उनके सटीक चुनावी विश्लेषण और राजनीतिक रिपोर्टिंग ने काफी प्रभाव छोड़ा.उनकी लेखनी का दायरा बेहद व्यापक है—संवेदनशील क्राइम रिपोर्टिंग से लेकर प्रमुख राजनीतिक हस्तियों के इंटरव्यू तक, उनकी हर खबर चर्चा में रही है. पत्रकारिता के माध्यम से कई बड़े मामलों का उद्भेदन करना उनकी विशेष पहचान है.झारखंड राज्य गठन के बाद अविनाश ने पलामू में काम करते हुये राजनीतिक से जुड़ी कई ऐसी खबर को ब्रेक किया ,जिसका असर राज्य की राजनीतिक पड़ा .प्रयोगधर्मी पत्रकार के रूप में भी इनकी पहचान है .संस्थान के प्रति समर्पण के लिए उन्हें 'बेस्ट एम्प्लोयी' जैसे पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है. प्रभात खबर के संघर्ष से लेकर इसके विकास और उत्थान के सफर में अविनाश एक सक्रिय सहभागी और सहयात्री रहे हैं.

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