गढ़वा : विश्वकर्मा पूजा पर जिले में सजे 1500 पूजा पंडाल, 15 लाख की बिकीं प्रतिमाएं

गढ़वा में गुरुवार को भगवान विश्वकर्मा की पूजा श्रद्धा और उत्साह के साथ होगी. जिलेभर में करीब 1500 पूजा पंडाल सजेंगे और 15 लाख रुपये की प्रतिमाएं स्थापित होंगी. कन्या संक्रांति के विशेष संयोग में होने वाली इस पूजा को लेकर लोगों में खासा उत्साह है, लेकिन बारिश की संभावना भी चिंता बढ़ा रही है.

गढ़वा. देवों के शिल्पकार और वास्तुकार भगवान विश्वकर्मा की पूजा गुरुवार को जिलेभर में श्रद्धा और उत्साह के साथ होगी. विश्वकर्मा पूजा को लेकर जिले में करीब 1500 स्थानों पर भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की जाएगी. पूजा को लेकर बाजार में भी रौनक बढ़ गई है. बुधवार को फूल-माला, पताका, झंडी सहित पूजा सामग्री की दुकानों पर खरीदारों की भीड़ रही. विभिन्न पूजा पंडालों में बुधवार देर शाम तक प्रतिमाएं पहुंचती रहीं.

कन्या संक्रांति के संयोग में होगी पूजा

इस बार विश्वकर्मा पूजा कन्या संक्रांति के संयोग में पड़ रही है. ज्योतिषीय गणना के अनुसार 17 सितंबर को सूर्य सिंह राशि से कन्या राशि में प्रवेश करेगा. कन्या संक्रांति का क्षण करीब सुबह 7:58 बजे बताया गया है. विभिन्न पंचांगों में पूजा के मुहूर्त में थोड़ा अंतर है. उपलब्ध गणना के अनुसार सुबह 7:58 बजे के बाद का समय पूजा के लिए महत्वपूर्ण माना गया है. कुछ पंचांगों में सुबह 7:58 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक का समय शुभ बताया गया है. हालांकि पूजा का समय स्थानीय पंचांग के अनुसार निर्धारित किया जाएगा.

दुकान से कारखाने तक होगी पूजा-अर्चना

विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर जिले की दुकानों, कार्यालयों, वर्कशॉप, कारखानों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और मशीनरी से जुड़े संस्थानों में विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी. पूजा को लेकर मशीनों और औजारों की साफ-सफाई कर उन्हें सजाया गया है. प्रमुख प्रतिष्ठानों में प्रसाद के लिए एक सप्ताह पहले ही लड्डू के ऑर्डर दिए जा चुके हैं. वहीं शहर में पंडितों की एडवांस बुकिंग भी हो चुकी है.

बुधवार की सुबह से ही शहर के बाजार में विश्वकर्मा पूजा की खरीदारी को लेकर चहल-पहल बढ़ गई. फूल-माला, पताका और झंडी की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ रही. विभिन्न स्थानों पर बनाए गए पूजा पंडालों में देर शाम तक भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमाएं पहुंचती रहीं.

मंत्री के निधन के कारण सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं होंगे

जानकारी के अनुसार मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के कारण इस वर्ष विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर जिले में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे. पूजा समितियों द्वारा केवल पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाएगा.

बारिश पूजा में डाल सकती है खलल

विश्वकर्मा पूजा के दिन मौसम भी पूजा आयोजकों की चिंता बढ़ा सकता है. मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार 17 सितंबर को जिले में करीब 12 मिलीमीटर बारिश होने की संभावना जताई गई है. इस दौरान अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है.

बारिश होने की स्थिति में खुले स्थानों पर बनाए गए पूजा पंडालों और प्रतिमा विसर्जन की तैयारियों पर असर पड़ सकता है. ऐसे में पूजा समितियों को मौसम को देखते हुए पंडालों और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी.

जिले भर में 15 लाख रुपये की प्रतिमा होगी स्थापित

विश्वकर्मा समाज के झारखंड प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेंद्र विश्वकर्मा ने बताया कि इस वर्ष जिले में करीब 15 लाख रुपये की विश्वकर्मा प्रतिमाओं की बिक्री हुई है. हालांकि महंगाई का असर प्रतिमा बिक्री पर भी पड़ा है. पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष प्रतिमाओं की बिक्री में कमी आई है.

पिछले वर्ष प्रतिमाओं की कीमत करीब 1500 से 5000 रुपये तक थी, जबकि इस वर्ष 2100 से 6000 रुपये तक प्रतिमाएं बिकी हैं.

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By Avinash Singh

अविनाश कुमार सिंह प्रभात खबर के गढ़वा ब्यूरो चीफ हैं. वह आंचलिक से लेकर राज्य मुख्यालय तक 27 वर्ष से अधिक की पत्रकारिता का अनुभव रखते हैं. राजनीतिक विश्लेषण, क्राइम रिपोर्टिंग, हाई-प्रोफाइल इंटरव्यू और खोजी पत्रकारिता.में इन्हें महारत हासिल है. अविनाश कुमार सिंह झारखंड की पत्रकारिता और 'प्रभात खबर' के विश्वसनीय चेहरा हैं, जिन्होंने खबरों की गुणवत्ता को हमेशा प्राथमिकता दी है. लगभग तीन दशकों (27 वर्ष) के अपने लंबे सफर में उन्होंने पलामू ब्यूरो प्रमुख के रूप में 10 साल से अधिक समय तक नेतृत्व किया. इसके बाद प्रदेश मुख्यालय (रांची) में काम करते हुए, विशेषकर वर्ष 2024 के चुनावों के दौरान, उनके सटीक चुनावी विश्लेषण और राजनीतिक रिपोर्टिंग ने काफी प्रभाव छोड़ा.उनकी लेखनी का दायरा बेहद व्यापक है—संवेदनशील क्राइम रिपोर्टिंग से लेकर प्रमुख राजनीतिक हस्तियों के इंटरव्यू तक, उनकी हर खबर चर्चा में रही है. पत्रकारिता के माध्यम से कई बड़े मामलों का उद्भेदन करना उनकी विशेष पहचान है.झारखंड राज्य गठन के बाद अविनाश ने पलामू में काम करते हुये राजनीतिक से जुड़ी कई ऐसी खबर को ब्रेक किया ,जिसका असर राज्य की राजनीतिक पड़ा .प्रयोगधर्मी पत्रकार के रूप में भी इनकी पहचान है .संस्थान के प्रति समर्पण के लिए उन्हें 'बेस्ट एम्प्लोयी' जैसे पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है. प्रभात खबर के संघर्ष से लेकर इसके विकास और उत्थान के सफर में अविनाश एक सक्रिय सहभागी और सहयात्री रहे हैं.

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