प्रभात खबर की खबर का असर: सीएम ने लिया संज्ञान, मेराल के संजयनगर में पहुंची राहत की बूंद

Prabhat Khabar Impact: गढ़वा के मेराल प्रखंड स्थित संजयनगर में जल संकट की खबर सामने आने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर प्रशासन हरकत में आया. अब बस्ती में टैंकर से पानी पहुंचाया जा रहा है और गैर मजरूआ जमीन पर नया चापाकल भी लगाया गया है, जिससे ग्रामीणों को राहत मिली है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

मेराल से संजय तिवारी की रिपोर्ट

Prabhat Khabar Impact: झारखंड के गढ़वा जिले के मेराल प्रखंड स्थित संजयनगर के लोगों को आखिरकार पेयजल संकट से राहत मिलती दिख रही है. वर्षों से गड्ढे का पानी पीने को मजबूर घासी परिवारों की समस्या प्रभात खबर में प्रमुखता से उठने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के संज्ञान में पहुंची. इसके बाद जिला प्रशासन तत्काल हरकत में आया और प्रभावित इलाके में टैंकर के माध्यम से पेयजल आपूर्ति शुरू कर दी गई. इसके साथ ही प्रशासन की ओर से बस्ती के समीप एक नया चापाकल भी लगाया गया है, जिससे लोगों में राहत और खुशी का माहौल है.

प्रभात खबर की रिपोर्ट के बाद सक्रिय हुआ प्रशासन

संजयनगर में जल संकट को लेकर प्रभात खबर में “संजयनगर में पानी के लिए संघर्ष: गड्ढे का पानी पीने को मजबूर” शीर्षक से प्रकाशित खबर के बाद मामला तेजी से चर्चा में आया. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्वयं इस मामले पर संज्ञान लेते हुए सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी. मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद गढ़वा जिला प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई शुरू की. उपायुक्त अनन्य मित्तल के निर्देश पर नगर परिषद के टैंकरों के माध्यम से प्रभावित बस्ती में पानी पहुंचाया जाने लगा.

बस्ती के पास लगाया गया नया चापाकल

प्रशासन ने केवल अस्थायी जलापूर्ति तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि स्थायी समाधान की दिशा में भी कदम उठाया. पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने बस्ती से सटे गैर मजरूआ भूमि पर नया चापाकल गाड़ दिया है. अधिकारियों का कहना है कि इससे संजयनगर के लोगों को अब दूर-दराज या गड्ढों से पानी लाने की मजबूरी नहीं रहेगी.

वन भूमि होने से वर्षों से अटका था मामला

जानकारी के अनुसार संजयनगर वार्ड संख्या 01 में रहने वाले घासी परिवार कई दशकों से सुरक्षित वन भूमि क्षेत्र में झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं. यही वजह थी कि प्रशासन वहां स्थायी सरकारी योजनाएं लागू नहीं कर पा रहा था. वन भूमि में कुआं, चापाकल या अन्य निर्माण कार्य कराने के लिए वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र आवश्यक होता है. तकनीकी और कानूनी अड़चनों के कारण लंबे समय से यहां पेयजल की स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकी थी.

प्रशासन ने बताई तकनीकी बाध्यता

मेराल अंचलाधिकारी सह बीडीओ जसवंत नायक ने बताया कि वन क्षेत्र के भीतर सरकारी चापाकल या कुआं बनाना कानूनी रूप से संभव नहीं है. हालांकि लोगों की परेशानी को देखते हुए बस्ती से मात्र 10 गज की दूरी पर स्थित गैर मजरूआ जमीन पर नया चापाकल लगाया गया है. उन्होंने कहा कि फिलहाल टैंकर से भी नियमित जलापूर्ति की जा रही है ताकि ग्रामीणों को किसी तरह की परेशानी न हो.

मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास जारी

अधिकारियों के अनुसार प्रशासन इन परिवारों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है. इन लोगों को पहले ही आधार कार्ड, राशन कार्ड और वोटर कार्ड जैसी सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा चुकी हैं. समय-समय पर कंबल और अन्य राहत सामग्री भी दी जाती रही है. गुरुवार को संजयनगर में रह रहे परिवारों के बीच मतदाता पहचान पत्र का भी वितरण किया गया.

वर्षों पुरानी समस्या का निकला समाधान

स्थानीय लोगों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी समस्या को लेकर गुहार लगा रहे थे, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल पा रहा था. मीडिया में खबर प्रकाशित होने और मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की. ग्रामीणों ने कहा कि अब उन्हें उम्मीद जगी है कि उनकी अन्य बुनियादी समस्याओं का भी समाधान होगा. पेयजल संकट दूर होने से बस्ती के लोगों ने राहत की सांस ली है.

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प्रशासन की त्वरित कार्रवाई की हो रही सराहना

संजयनगर में जलापूर्ति शुरू होने और नया चापाकल लगने के बाद प्रशासन की त्वरित कार्रवाई की सराहना की जा रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह संवेदनशीलता के साथ समस्याओं का समाधान किया जाए, तो दूरदराज और वंचित बस्तियों के लोगों का जीवन बेहतर हो सकता है.

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By Kumarvishwat sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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