गढ़वा. गढ़वा जिले के भवनाथपुर और आसपास के लोगों के लिए यात्री ट्रेन आज भी इंतजार का विषय बनी हुई है. वर्ष 1985 से भवनाथपुर को रेल यातायात से जोड़ने और यात्री ट्रेन चलाने की मांग उठ रही है. चार दशक से अधिक समय में यह मांग कई बार जनप्रतिनिधियों से लेकर संसद और रेल मंत्रालय तक पहुंची. वर्ष 2007 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव द्वारा सार्वजनिक मंच से यात्री ट्रेन चलाने की घोषणा की गयी. वर्ष 2009 में मेराल से टाउनशिप होते हुए सलाईबनवा तक रेल लाइन विस्तार का सर्वे भी हुआ. इसके बावजूद यात्री ट्रेन का परिचालन शुरू नहीं हो सका.
माल ढुलाई के लिए बनी थी 34 किमी रेललाइन
भवनाथपुर की खदानों से लाइम स्टोन और डोलोमाइट की ढुलाई के लिए मेराल से भवनाथपुर तक करीब 34 किलोमीटर रेल लाइन बिछायी गयी थी. इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से मालगाड़ियों के परिचालन में होता था. घाघरा और तुलसीदामर क्षेत्र से निकलने वाला खनिज बोकारो, भिलाई और राउरकेला जैसे औद्योगिक क्षेत्रों तक भेजा जाता था. समय के साथ खनन और इससे जुड़े कार्य बंद होते गये. वर्ष 1990 में क्रशिंग प्लांट बंद हुआ, जबकि वर्ष 2020 में डोलोमाइट खदान बंद होने के बाद मालगाड़ियों का परिचालन भी थम गया. इसके बाद रेलखंड का नियमित उपयोग लगभग समाप्त हो गया.
घोषणा और सर्वे, दोनों के बाद भी नहीं बढ़ी बात
वर्ष 2007 में भवनाथपुर क्षेत्र में यात्री ट्रेन चलाने की घोषणा हुई थी. इसी दौर में लोकसभा में रेल बजट चर्चा के दौरान गढ़वा-भवनाथपुर क्षेत्र के लिए नई ट्रेन चलाने की मांग भी दर्ज हुई थी. इसके दो साल बाद वर्ष 2009 में तत्कालीन सांसद घूरन राम की मांग पर मेराल से टाउनशिप होते हुए उत्तर प्रदेश के सलाईबनवा स्टेशन तक रेल लाइन विस्तार का सर्वे कराया गया. लेकिन सर्वे के बाद परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी. इस तरह घोषणा और सर्वे, दोनों के बावजूद यात्री रेल सेवा धरातल पर नहीं उतर सकी.
2022 में ज्ञापन, 2026 में फिर तेज हुआ आंदोलन
यात्री ट्रेन की मांग को लेकर वर्ष 2022 में मेराल रेलवे स्टेशन पर ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने धनबाद रेल मंडल के डीआरएम के नाम ज्ञापन सौंपा था. इसमें मेराल-भवनाथपुर रेल लाइन पर यात्री ट्रेन चलाने की मांग की गयी थी. अब वर्ष 2026 में यह मांग फिर आंदोलन का रूप ले रही है. सितंबर में भवनाथपुर और खरौंधी क्षेत्र में बैठकों के बाद मेराल-भवनाथपुर-चोपन रेल सेवा की मांग को लेकर संघर्ष समिति बनाने की पहल हुई. 21 सितंबर को मझिआंव प्रखंड के दवनकरा में रेलवे लाइन के किनारे ग्रामीणों की बैठक हुई. ग्रामीणों ने रेल मंत्री के नाम मांगपत्र भेजकर यात्री ट्रेन चलाने की मांग की है. ग्रामीणों ने 15 दिनों में सकारात्मक पहल नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है.
अब बरवाडीह से आगे चोपन तक की मांग
चार दशक पहले मांग मुख्य रूप से भवनाथपुर को बरवाडीह से जोड़कर यात्री ट्रेन चलाने की थी. अब मांग का दायरा बढ़ गया है. स्थानीय संगठनों और ग्रामीणों की ओर से मेराल-भवनाथपुर-खरौंधी-कोन-सलाईबनवा होते हुए चोपन तक रेल संपर्क विकसित करने की मांग उठायी जा रही है. ग्रामीणों का कहना है कि इससे भवनाथपुर, मेराल, खरौंधी, केतार, मझिआंव, बरडीहा, विशुनपुरा समेत आसपास के क्षेत्रों के लोगों को आवागमन का वैकल्पिक साधन मिल सकता है. छात्रों, मजदूरों, किसानों, मरीजों और छोटे कारोबारियों को इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद जतायी जा रही है.
पहले से मौजूद पटरी, फिर भी यात्री सेवा नहीं
इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू यह है कि मेराल से भवनाथपुर तक रेल ढांचा पहले से मौजूद है, लेकिन इसका यात्री परिवहन में इस्तेमाल नहीं हो रहा है. लंबे समय तक मालगाड़ी नहीं चलने के कारण रेल लाइन के रखरखाव और सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं. ट्रैक से जुड़ी सामग्री चोरी होने की शिकायतें भी सामने आयी हैं. ऐसे में यात्री सेवा शुरू करने से पहले रेलखंड की तकनीकी स्थिति, सुरक्षा और आवश्यक मरम्मत का आकलन महत्वपूर्ण होगा. स्थानीय लोगों की मांग है कि पहले मेराल-भवनाथपुर के मौजूदा रेलखंड की तकनीकी जांच कर यात्री सेवा शुरू करने की दिशा में पहल हो और इसके बाद चोपन तक विस्तार पर काम किया जाये.
चार दशक का सफर
1985 -भवनाथपुर को रेल यातायात से जोड़ने और यात्री ट्रेन चलाने की मांग शुरू.
2007 - तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव द्वारा यात्री ट्रेन चलाने की सार्वजनिक घोषणा; लोकसभा में भी मांग दर्ज.
2009 -मेराल-टाउनशिप-सलाईबनवा रेल विस्तार का सर्वे.
2020 - डोलोमाइट खदान बंद होने के बाद मालगाड़ी परिचालन ठप.
2022 - मेराल स्टेशन पर डीआरएम के नाम ज्ञापन देकर यात्री ट्रेन की मांग दोहरायी गयी.
2026 -भवनाथपुर, खरौंधी और मझिआंव क्षेत्र में बैठकों के बाद आंदोलन फिर तेज.
सवाल अब भी वही : कब दौड़ेगी यात्री ट्रेन
घोषणा हुई, सर्वे हुआ, ज्ञापन सौंपे गये और अब आंदोलन भी तेज हो रहा है. इसके बावजूद भवनाथपुर की रेल पटरी पर यात्री ट्रेन का इंतजार खत्म नहीं हुआ है. चार दशक से चली आ रही मांग अब इस सवाल पर टिक गयी है कि मौजूदा रेलखंड की तकनीकी स्थिति की जांच कर यात्री सेवा शुरू करने की दिशा में रेलवे कब ठोस कदम उठाता है.
