गढ़वा: डाक बंगले में न पंखा चला, न मिला पानी, व्यवस्था देख भड़के विधायक

धुरकी के डाक बंगले में मूलभूत सुविधाओं का अभाव देख विधायक अनंत प्रताप देव भड़क उठे. उन्होंने वन विभाग के अधिकारी को फोन कर अव्यवस्था तुरंत ठीक करने का निर्देश दिया.

धुरकी. उमस भरी गर्मी में ग्रामीणों की समस्याएं सुनने धुरकी पहुंचे भवनाथपुर विधायक अनंत प्रताप देव जब वन विभाग के डाक बंगले में पहुंचे, तो वहां की बदहाल व्यवस्था देखकर नाराज हो गये. विधायक ने गर्मी को देखते हुए पंखा और कूलर चालू कराने को कहा, लेकिन बताया गया कि भवन में पंखे और बिजली की वायरिंग तो है, पर तार डिस्कनेक्ट होने के कारण बिजली की व्यवस्था ही चालू नहीं है.

इसके बाद विधायक ने डाक बंगले में पानी की व्यवस्था के बारे में जानकारी ली. यहां भी पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आयी. डाक बंगले के आसपास गंदगी और उगी झाड़ियों को देखकर विधायक ने नाराजगी जतायी. उन्होंने मौके से ही वन विभाग के डीएफओ को फोन कर डाक बंगले की स्थिति से अवगत कराया और तत्काल व्यवस्था दुरुस्त कराने का निर्देश दिया.

विधायक ने कहा कि प्रखंड स्तर पर महत्वपूर्ण लोगों के ठहरने के लिए वन विभाग का डाक बंगला एक प्रमुख व्यवस्था है. इसके बावजूद यहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव है. उन्होंने सभी कमरों में एसी लगाने के साथ पानी की समुचित व्यवस्था कराने को कहा.

बताया गया कि डाक बंगले में पानी के लिए बोर कराया गया था, लेकिन पर्याप्त पानी नहीं मिल सका. इस कारण यहां किसी कार्यक्रम के आयोजन पर बाहर से पानी मंगाना पड़ता है. विधायक ने डाक बंगले की साफ-सफाई, बिजली और पानी की व्यवस्था दुरुस्त कर इसे नियमित उपयोग के योग्य बनाने का निर्देश दिया.

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By Avinash Singh

अविनाश कुमार सिंह प्रभात खबर के गढ़वा ब्यूरो चीफ हैं. वह आंचलिक से लेकर राज्य मुख्यालय तक 27 वर्ष से अधिक की पत्रकारिता का अनुभव रखते हैं. राजनीतिक विश्लेषण, क्राइम रिपोर्टिंग, हाई-प्रोफाइल इंटरव्यू और खोजी पत्रकारिता.में इन्हें महारत हासिल है. अविनाश कुमार सिंह झारखंड की पत्रकारिता और 'प्रभात खबर' के विश्वसनीय चेहरा हैं, जिन्होंने खबरों की गुणवत्ता को हमेशा प्राथमिकता दी है. लगभग तीन दशकों (27 वर्ष) के अपने लंबे सफर में उन्होंने पलामू ब्यूरो प्रमुख के रूप में 10 साल से अधिक समय तक नेतृत्व किया. इसके बाद प्रदेश मुख्यालय (रांची) में काम करते हुए, विशेषकर वर्ष 2024 के चुनावों के दौरान, उनके सटीक चुनावी विश्लेषण और राजनीतिक रिपोर्टिंग ने काफी प्रभाव छोड़ा.उनकी लेखनी का दायरा बेहद व्यापक है—संवेदनशील क्राइम रिपोर्टिंग से लेकर प्रमुख राजनीतिक हस्तियों के इंटरव्यू तक, उनकी हर खबर चर्चा में रही है. पत्रकारिता के माध्यम से कई बड़े मामलों का उद्भेदन करना उनकी विशेष पहचान है.झारखंड राज्य गठन के बाद अविनाश ने पलामू में काम करते हुये राजनीतिक से जुड़ी कई ऐसी खबर को ब्रेक किया ,जिसका असर राज्य की राजनीतिक पड़ा .प्रयोगधर्मी पत्रकार के रूप में भी इनकी पहचान है .संस्थान के प्रति समर्पण के लिए उन्हें 'बेस्ट एम्प्लोयी' जैसे पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है. प्रभात खबर के संघर्ष से लेकर इसके विकास और उत्थान के सफर में अविनाश एक सक्रिय सहभागी और सहयात्री रहे हैं.

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