गढ़वा से अविनाश की रिपोर्ट
Garhwa News: झारखंड के गढ़वा जिले के जिले की चरमराती शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए बुधवार को प्रशासन ने अब तक का सबसे बड़ा हंटर चलाया है. उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी अनन्य मित्तल के निर्देश पर जिले के 67 प्राथमिक, मध्य और उच्च विद्यालयों में एक साथ औचक निरीक्षण किया गया. जिला शिक्षा पदाधिकारी कैसर रजा और जिला शिक्षा अधीक्षक अनुराग मिंज के नेतृत्व में चली इस व्यापक कार्रवाई से पूरे जिले के शैक्षणिक गलियारे में हड़कंप मच गया.
रंका में कई टीचर मिले गायब
निरीक्षण के दौरान कहीं स्कूल के ताले बंद मिले, तो कहीं शिक्षक बिना किसी सूचना के अपनी ड्यूटी से नदारद पाए गए. अभियान के दौरान जिला शिक्षा पदाधिकारी कैसर रजा ने रंका प्रखंड के राजकीयकृत प्लस टू उच्च विद्यालय और नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्कूल सहित कई संस्थानों की जांच की. यहां कई शिक्षक अनुपस्थित पाए गए, जिनसे तत्काल स्पष्टीकरण मांगते हुए विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
मेराल में बंद मिला प्राथमिक विद्यालय
दूसरी ओर, जिला शिक्षा अधीक्षक अनुराग मिंज जब मेराल प्रखंड के कोलोदोहर प्राथमिक विद्यालय पहुंचे, तो वहां स्कूल ही बंद पाया गया. निरीक्षण टीम ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए संबंधित अधिकारियों को तलब किया है.
कस्तूरबा विद्यालयों की भी हुई जांच
जिले के सभी कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों की भी सघन जांच की गई, जहां छात्राओं के खाने, सुरक्षा और आवासीय सुविधाओं का बारीकी से जायजा लिया गया. निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि जहां कुछ स्कूलों में पीने के पानी और शौचालय की व्यवस्था ठीक थी, वहीं कई जगहों पर साफ-सफाई और पढ़ाई की गुणवत्ता में भारी कमी दिखी.
पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने पर जोर
अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि शिक्षक केवल उपस्थिति न दर्ज करें, बल्कि ‘पाठ योजना’ बनाकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करें. जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सरकारी स्कूलों में बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और आने वाले दिनों में यह औचक निरीक्षण अभियान और भी तेज गति से जारी रहेगा, जिससे कि लापरवाह कर्मियों पर नकेल कसी जा सके.
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