परचून की दुकान पर गांजे का धंधा, बाप-बेटा समेत चार गिरफ्तार, 72,000 नकद बरामद

Garhwa News: गढ़वा पुलिस ने किराना दुकान की आड़ में चल रहे गांजा कारोबार का खुलासा करते हुए चार लोगों को गिरफ्तार किया है. आरोपियों के पास से 6 किलो गांजा और 72 हजार रुपये नकद बरामद हुए हैं. गिरफ्तार लोगों में दो पिता-पुत्र की जोड़ियां शामिल हैं. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

गढ़वा से प्रभाष मिश्रा की रिपोर्ट

Garhwa News: झारखंड के गढ़वा जिले में पुलिस ने नशा कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए चार लोगों को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने आरोपियों के पास से कुल 6 किलो गांजा और 72,597 रुपये नकद बरामद किए हैं. गिरफ्तार आरोपियों में दो पिता-पुत्र की जोड़ियां शामिल हैं, जो गढ़वा और रंका थाना क्षेत्र के रहने वाले बताए जा रहे हैं. पुलिस ने इस पूरे मामले का खुलासा प्रेस वार्ता के दौरान किया. अधिकारियों के अनुसार किराना दुकान की आड़ में गांजे की खरीद-बिक्री का धंधा चलाया जा रहा था.

गुप्त सूचना पर गठित हुई विशेष टीम

गढ़वा एसडीपीओ नीरज कुमार ने बताया कि 13 मई 2026 की शाम करीब चार बजे पुलिस अधीक्षक आशुतोष शेखर को गुप्त सूचना मिली थी कि गढ़वा थाना क्षेत्र के हुर मधेया गांव स्थित एक किराना दुकान में अवैध रूप से गांजे की बिक्री की जा रही है. सूचना को गंभीरता से लेते हुए एसपी के निर्देश पर एसडीपीओ के नेतृत्व में विशेष छापेमारी दल का गठन किया गया. पुलिस टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए संदिग्ध ठिकाने पर दबिश दी.

किराना दुकान से मिला गांजा और नकदी

छापेमारी के दौरान पुलिस ने हुर मधेया गांव स्थित चंद्रदेव चौधरी और राजकुमार चौधरी के घर पर संचालित किराना दुकान की तलाशी ली. तलाशी के दौरान दुकान से 4 किलो गांजा और गांजा बिक्री से जुड़े 72,597 रुपये नकद बरामद किए गए. पुलिस ने मौके पर ही दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया.

पूछताछ में सामने आया सप्लायर का नाम

पुलिस पूछताछ में चंद्रदेव चौधरी और राजकुमार चौधरी ने खुलासा किया कि वे रंका थाना क्षेत्र के सलेया गांव निवासी मनोज प्रसाद और उसके पुत्र प्रकाश प्रसाद से गांजा खरीदते थे. आरोपियों ने बताया कि गांजा खरीदने के बाद उसे ऊंचे दामों पर इलाके में बेचा जाता था. पूछताछ के बाद पुलिस ने तत्काल सप्लायरों की गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई शुरू कर दी.

रंका में छापेमारी कर पिता-पुत्र को पकड़ा

आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस टीम रंका थाना क्षेत्र के सलेया गांव पहुंची. वहां मनोज प्रसाद के घर पर छापेमारी की गई. छापेमारी के दौरान पुलिस ने घर से 2 किलो अतिरिक्त गांजा बरामद किया. गांजा सप्लाई की पुष्टि होने के बाद मनोज प्रसाद और उसके पुत्र प्रकाश प्रसाद को भी गिरफ्तार कर लिया गया.

एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज हुआ मामला

इस मामले में गढ़वा थाना में कांड संख्या 324/26 के तहत एनडीपीएस एक्ट में प्राथमिकी दर्ज की गई है. पुलिस ने गिरफ्तार सभी आरोपियों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई के लिए भेज दिया है. गिरफ्तार आरोपियों में हुर मधेया निवासी चंद्रदेव चौधरी और राजकुमार चौधरी, जबकि रंका के सलेया गांव निवासी मनोज प्रसाद और प्रकाश प्रसाद शामिल हैं.

पुलिस ने बताया बड़ी सफलता

एसडीपीओ नीरज कुमार ने कहा कि जिले में नशा कारोबार के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है. पुलिस की कोशिश है कि युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाया जा सके और अवैध कारोबार पर पूरी तरह अंकुश लगाया जाए. उन्होंने कहा कि किसी भी कीमत पर नशा कारोबारियों को बख्शा नहीं जाएगा और ऐसे तत्वों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी.

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कई अधिकारियों ने निभाई अहम भूमिका

इस कार्रवाई में प्रशिक्षु डीएसपी चिरंजीव मंडल, थाना प्रभारी सुनील कुमार तिवारी, पुलिस अवर निरीक्षक आदित्य कुमार नायक, प्रदीप उरांव, प्रदीप यादव, सुबोध बड़ाईक, रंजन कुमार साह, सुरेंद्र सिंह कुंटिया, रामसिंह गगरई, एएसआई अभिमन्यु कुमार सिंह, अरविंद कुमार दुबे, संजय सिंह और सशस्त्र बल के जवान शामिल थे. पुलिस की इस कार्रवाई को जिले में नशा तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है.

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Published by: KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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