बांकी नदी के अस्तित्व पर संटक, स्वच्छता अभियान को चिढ़ा रही मुंह

नाले में तब्दील हुई बांकी नदी, महामारी के डर व दुर्गंध से लोग परेशान

नाले में तब्दील हुई बांकी नदी, महामारी के डर व दुर्गंध से लोग परेशान प्रतिनिधि, श्री वंशीधर नगर कभी श्री बंशीधर नगर की जीवनरेखा और पहचान मानी जाने वाली ””””बांकी नदी”””” आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है. प्रशासन की घोर अनदेखी और जन-जागरूकता के अभाव में यह पवित्र नदी अब एक बड़े गंदे नाले में तब्दील हो चुकी है. नदी के अस्तित्व पर मंडराते इस खतरे ने न केवल पर्यावरण, बल्कि स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है. स्थिति यह है कि स्वच्छ भारत अभियान के बड़े-बड़े दावे यहां धरातल पर दम तोड़ते नजर आ रहे हैं. शहर के बीच से गुजरने वाली इस नदी की स्थिति अत्यंत दयनीय है. घरों का कूड़ा, प्रतिबंधित प्लास्टिक और होटलों का अवशिष्ट सीधे नदी में फेंका जा रहा है. बहाव रुकने और पानी के सड़ने से पूरे इलाके में असहनीय दुर्गंध फैल रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि मच्छरों और कीड़ों के पनपने से क्षेत्र में डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड जैसी संक्रामक बीमारियों का खतरा चरम पर है. यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाये गये, तो यह शहर के लिए एक बड़ी स्वास्थ्य आपदा बन सकती है. प्रशासनिक चेतावनी कागजों तक सीमित नदी को साफ रखने के लिए अधिकारी कार्रवाई की बात तो करते हैं, लेकिन धरातल पर सफाई का कोई खाका नजर नहीं आता. लोगों का कहना हैं कि श्री वंशीधर नगर की इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए केवल सरकारी फाइलों पर काम होने से नहीं चलेगा. इसके लिए जन-भागीदारी और प्रशासनिक इच्छाशक्ति का संगम अनिवार्य है. नदी में कचरा फैलाने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी राम कमल ने कहा कि नदी को स्वच्छ रखना सभी की साझा जिम्मेदारी है. हम स्थिति की निगरानी कर रहे हैं. अगर कोई नदी में कचरा फैलाते हुए पाया गया, तो उसे चिह्नित कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जायेगी. विधायक ने कॉरिडोर निर्माण का दिया भरोसा बांकी नदी के संरक्षण को लेकर स्थानीय विधायक अनंत प्रताप देव ने गंभीर चिंता व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि नदी का विलुप्त होना एक बड़ी समस्या है. बांकी नदी के संरक्षण और श्री वंशीधर मंदिर के किनारे इसे भव्य रूप देने के लिए मैंने विधानसभा में ””””””””बांकी नदी कॉरिडोर”””””””” बनाने की मांग प्रमुखता से रखी है. जल्द ही इस समस्या का स्थायी निदान मिल जायेगा. उन्होंने लोगों से भी नदी में कचरा नहीं फेंकने की अपील की है. बांकी नदी की बदहाली के मुख्य कारण अतिक्रमण: नदी के किनारों पर बढ़ते अवैध निर्माण से इसका स्वरूप सिमटता जा रहा है. अपशिष्ट प्रबंधन का अभाव: शहर का सारा ड्रेनेज सिस्टम सीधे नदी में खुल रहा है. जन-उदासीनता: नदी में धड़ल्ले से कूड़ा फेंका जा रहा है

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By Akarsh aniket

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