प्रभात इंपैक्ट प्रतिनिधि, मेराल(गढ़वा ) संजयनगर में पानी के लिए संघर्ष कर रहे घासी परिवारों की समस्या पर प्रभात खबर की रिपोर्ट के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संज्ञान लिया. इसके बाद गढ़वा जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया. उपायुक्त अनन्य मित्तल के निर्देश पर तुरंत गढ़वा नगर परिषद के टैंकर से प्रभावित क्षेत्र में जलापूर्ति शुरू कर दी गयी. साथ ही पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने बस्ती से सटे जीएम (गैर मजरूआ) लैंड पर नया चापाकल भी स्थापित कर दिया. संजयनगर (वार्ड संख्या 01) के यह परिवार दशकों से सुरक्षित वन भूमि में झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं. वन भूमि होने के कारण प्रशासन वहां कुआं, चापाकल या अन्य स्थायी योजनाएं नहीं चला सकता था, क्योंकि वन विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र जरूरी है. इस तकनीकी पेंच के कारण परिवार लंबे समय से पेयजल संकट झेल रहे थे. हालांकि प्रशासन ने परिवारों को मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास लगातार जारी रखे हैं. मेराल अंचलाधिकारी सह बीडीओ जसवंत नायक ने बताया कि परिवारों को पहले ही आधार कार्ड, वोटर कार्ड और राशन कार्ड जैसी सुविधाएं मिल चुकी हैं. समय-समय पर कंबल और राहत सामग्री भी दी जाती रही है. गुरुवार को संजयनगर में मतदाता पहचान पत्र का वितरण भी किया गया. स्थानीय लोगों ने कहा कि मीडिया के माध्यम से अपनी समस्या उजागर करने और मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद वर्षों पुरानी समस्या का तुरंत समाधान हो गया. प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से बस्ती के लोगों ने राहत की सांस ली है. ……… कोट वन क्षेत्र में सरकारी चापाकल या कुआं नहीं बन सकता, लेकिन बस्ती से मात्र 10 गज की दूरी पर गैर मजरूआ भूमि पर नया चापाकल लगवा दिया गया है और टैंकर से भी पानी भेजा जा रहा है. जसवंत नायक, अंचलाधिकारी सह बीडीओ, मेराल
संजयनगर में गड्ढे का पानी पीने की खबर पर सीएम ने लिया संज्ञान, हरकत में आया प्रशासन
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