धुरकी. धुरकी प्रखंड के छत्तीसगढ़ सीमा से सटे कनहर नदी के किनारे स्थित गांव शुरू के आदिम जनजाति टोला के लोगों की हाथी के भय से मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. इसका असर लोगों की दिनचर्या पर पड़ने लगा है. वहीं खाने-पीने में भी परेशानी बढ़ने लगी है. लोगों ने बताया कि उन लोगों का मुख्य पेशा मजदूरी है. पूरे गांव के लोग मजदूरी पर ही निर्भर है. गांव में काम नहीं मिलने की वजह इस टोले के सभी महिला-पुरुष दूसरे गांव में जाकर काम करते हैं. उनका गांव चारों तरफ जंगल से घिरा है. इस समय हाथियों ने उनके गांव के पास के जंगल में शरण ले रखी है. इस कारण वे लोग हाथियोंं के भय से दूसरे गांव में मजदूरी करने नहीं निकल पा रहे हैं. 25-30 की संख्या में है हाथियों का दो झुंड : ग्रामीणों ने बताया कि हाथियों का झुंड दो भागों में देखा जा रहा है. इसमें 25-30 की संख्या में हाथी हैं. उनके भय से उन्हें घर से बाहर निकलने में खतरा महसूस हो रहा है. यदि वे किसी तरह से मजदूरी करने निकल भी जाते हैं, तो लौटने में उन्हें अंधेरा हो जाता है. तब हाथियों से सामना होने का डर रहता है. चना, सरसों व अरहर की फसलें नष्ट कर दी : लोगों ने बताया कि सोमवार को शाम होते ही हाथियों ने गांव में आकर पप्पू परहिया, रमेश परहिया और परमेश्वर परहिया का घर क्षतिग्रस्त कर दिया. अबतक हाथी सात लोगों के घर क्षतिग्रस्त कर चुके हैं. वही टोले के सभी व्यक्ति का करीब 25 से 30 एकड़ में लगी चना, सरसों व अरहर की फसलें नष्ट कर दी हैं. स्कूल में ले रखी है शरण : इस समय 25 से 30 घर की आबादी हाथी के भय से गांव की स्कूल में शरण लिये हुए हैं. हाथी के भय से सारे ग्रामीण इकट्ठा होकर स्कूल में रात गुजारते हैं. कुछ लोग रतजगा भी कर रहे हैं. रविवार की रात भी हाथियों का झुंड शाम ढलते ही उनके गांव पहुंच गया और दो लोगों का घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया. इससे प्रभावित किसान मीनरास परहिया एवं श्रवण परहिया ने बताया कि हाथियों का झुंड उनके गांव पहुंचकर उनके घर को क्षतिग्रस्त करने लगे. घर गिराने के बाद घर में रखा अनाज चट कर गये. गत 10 दिनों से ही स्थिति : ग्रामीणों ने बताया कि पिछले 10 दिनों से यही स्थिति बनी हुई है. जंगल के किनारे गांव होने की वजह से वे लोग कोई काम नहीं कर पा रहे हैं. हाथी कनहर नदी में पानी पीकर जंगल में विचरण करते रहते हैं. इस कारण वे लोग बच्चों को स्कूल जाने से भी रोक रहे हैं. विदित हो कि हाथियों का झुंड कनहर तटीय इलाके के गांव लिखनीधौरा, कदवा, भंडार, अम्बाखोरया, बरसोती, खाला, शुरू व सेमरावा गांव में विचरण कर रहे हैं. इस वजह से जहां लोगों की रबी फसल प्रभावित हो रही है. हाथी के भय से लोग महुआ चुनने जंगल नहीं जा पायेंगे, जो यहां के ग्रामीणों की आय का अच्छा स्रोत है. जंगल में महुआ चुनने वाले लोग भयभीत हो रहे हैं. यद्यपि वन विभाग ने प्रखंड के चार पंचायत भंडार, खाला, खुटिया और अंबाखोरेया को पूर्व में हाथी जोन घोषित कर दिया है. हाथियों से सजग रहने की दी गयी है सलाह : वनपाल इस संबंध में वनपाल प्रमोद कुमार ने बताया कि उन्हें हाथियों द्वारा गांव में किये गये नुकसान की सूचना मिली है. इस आलोक में ग्रामीणों को बीच कुछ सामग्री बांटी गयी है और उन्हें जागरूक किया गया है. ग्रामीणों को जंगल में समय नहीं गुजारने और हाथी से सजग रहने की सलाह दी गयी है. सभी को शाम होते ही सुरक्षित स्थान पर रहने को कहा गया है.
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