मिट्टी को भी भगवान का रूप दे देने वाले कलाकार आदर के पात्र : एसडीएम

कॉफी विद एसडीएम कार्यक्रम में जिले के शिल्पकार व मूर्तिकारों ने अपनी समस्याएं व सुझाव साझा किये

कॉफी विद एसडीएम कार्यक्रम में जिले के शिल्पकार व मूर्तिकारों ने अपनी समस्याएं व सुझाव साझा किये प्रतिनिधि, गढ़वा पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत बुधवार को सदर एसडीएम संजय कुमार ने अपने नियमित साप्ताहिक कार्यक्रम कॉफी विद एसडीएम में क्षेत्र के मूर्तिकारों के साथ संवाद किया. मूर्तिकारों ने एसडीएम के साथ अपनी समस्याएं व सुझावों को साझा किया. मूर्तिकारों ने मिट्टी की सहज उपलब्धता, बाजार तक पहुंच तथा उनके कार्य को प्रोत्साहन देने के लिए मेले का आयोजन करने की मांग रखी. एसडीएम संजय कुमार ने मूर्तिकारों को आश्वस्त किया कि उनके कौशल विकास व प्रशिक्षण के लिए हर संभव प्रयास किये जायेंगे. साथ ही उन्होंने कहा कि मिट्टी को भी भगवान का रूप देने वाले कलाकार आदर के पात्र हैं. उन्होंने भरोसा दिलाया कि शीघ्र ही गढ़वा में विशेष रूप से मिट्टी के कलाकारों के लिए एक भव्य ””””””””मृदा शिल्प मेला ”””””””” आयोजित किया जाएगा, जिससे उन्हें अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित करने और बाजार से सीधे जुड़ने का अवसर मिलेगा. एसडीएम ने कहा कि सभी शिल्पकार न केवल कला के संरक्षक हैं, बल्कि हमारी संस्कृति, धर्म और परंपरा के वाहक भी हैं. प्रशासन उनके विकास और हर सुख दुख में उनके साथ खड़ा है. उन्होंने कहा कि कलाकारों पर ईश्वर की विशेष कृपा होती है इसलिए उनकी विद्या के कारण वे सभी आदर के पात्र हैं. कोयल नदी की मिट्टी मूर्ति निर्माण अनुकूल मूर्तिकारों ने कहा कि गढ़वा में कोयल नदी के तटीय इलाकों की मिट्टी मूर्ति निर्माण के लिए काफी अनुकूल है. यहां पुआल की भी पर्याप्त उपलब्धता है. साथ ही लोगों में सीखने की प्रवृत्ति भी है. इको-फ्रेंडली होती हैं मिट्टी की मूर्तियां मूल रूप से बंगाल के रहने वाले राष्ट्रपति के हाथों पुरस्कृत मूर्तिकार संजय सूत्रधार ने बताया कि मिट्टी और पुआल से बनी मूर्तियां पूरी तरह से जलाशयों में विसर्जन करने योग्य होती हैं, उनसे किसी भी प्रकार का जल प्रदूषण नहीं होता है. चाइनीज सामग्री तथा प्लास्टर, पेरिस और खतरनाक रंगों से बनी मूर्तियां जल प्रदूषण के दृष्टिकोण से हानिकारक हैं. छोटी मूर्तियों के लिए स्थानीय स्तर पर बाजार की कमी कांडी प्रखंड के रहने वाले देवेंद्र प्रजापति और सदर प्रखंड के उदय प्रजापति ने कहा कि त्योहारों के दौरान बड़ी मूर्तियां बनाने वाले लोग बाजार में मिला जाते हैं पर छोटी मूर्ति, खिलौनें आदि के लिए गढ़वा में बाजार नहीं है. यदि प्रशासनिक स्तर से ब्रांडिंग और बाजार उपलब्ध करायी जाये, तो इस क्षेत्र में काफी अच्छा विकास हो सकता है. मिट्टी की उपलब्धता की मांग हरिहरपुर निवासी विनोद प्रजापति व कुछ अन्य मूर्तिकारों ने कहा कि वे लोग जब नदी किनारे मिट्टी उठाने जाते हैं तो स्थानीय लोग उनको मना कर देते हैं. हर प्रखंड के तटीय इलाकों में मूर्तिकारों के इलाका चिह्नित करने की जरूरत है. इससे मूर्तिकार निर्बाध कार्य कर सकेंगे. मूर्तिकारों को मिले प्रशिक्षण गढ़वा के तेनार गांव निवासी दिव्यांग शिल्पकार संतोष कुमार प्रजापति ने मांग रखी कि प्रशासनिक स्तर से गढ़वा के शिल्पकारों को अत्याधुनिक तौर तरीकों से अवगत कराते हुए प्रशिक्षण दिया जाये. साथ ही उन्हें विश्वकर्मा योजना के तहत या किसी अन्य कल्याणकारी योजना के तहत उपकरण आदि में मदद दी जाये. सम्मान-जनक जीविका है मूर्ति कला शिल्पकार शिबू कुमार ने कहा कि एक समय था जब उनके लिए 2 वक्त की रोटी का इंतजाम करना भी मुश्किल हो गया था. इसके बाद वह इस विधा से जुड़कर हर महीने 15 से 20 हजार रुपए कमा रहे हैं. इस दिशा में प्रशिक्षण लेकर युवा एक सम्मानजनक व्यवसाय से जुड़ सकते हैं. अखबारी कागज और रद्दी आइटम से भी बनाते हैं कलाकृतियां संजय सूत्रधार, शिबू कुमार, देवेंद्र आदि ने बताया कि वे पुराने अखबारों व रद्दी कागजों को भिगोकर उससे बनी लुगदी में मिट्टी मिलाकर भी मूर्तियां बनायी जा सकती हैं, जो इको फ्रेंडली होती हैं. शिल्प मेला का आयोजन जल्द संजय कुमार ने मूर्तिकारों की मांग पर कहा कि वे मिट्टी से जुड़े कलाकारों को मंच और पहचान देने के लिए तीन दिवसीय मृदा शिल्प मेला मुख्यालय स्तर पर आयोजित करने की कोशिश करेंगे. उक्त मेले का आयोजन दिवाली के समय किया जायेगा. इस दौरान एसडीएम ने सभी शिल्पकारों को अंगवस्त्र ओढ़ाकर सम्मानित किया.

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By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

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