गढ़वा : गढ़वा शहर में बाइपास नहीं होने के कारण आये दिन जाम रहने के कारण लोगों की परेशानी बढ़ जाती है़ बाइपास नहीं रहने के कारण शहर में दुर्घटना में कई लोगों की अब तक मौत हो चुकी है़
पिछले दो दशक से बाइपास को लेकर राजनीति की जाती रही है, लेकिन इस पर अभी तक सरकार ने कोई संज्ञान नहीं लिया है़ शुक्रवार की रात शहर के रंका मोड़ पर एक 70 वर्षीय महिला को एक ट्रक ने रौंद दिया, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गयी़ इसके पूर्व मेन रोड में ही ट्रक की चपेट में आने से एक युवक की मौत हो गयी थी़ जाम रहने के कारण आये दिन स्कूली बच्चों व मरीजों को घंटों जाम में फंसे रहना, उनकी नियति बन गयी है़ यद्यपि जिला प्रशासन द्वारा जाम से निजात के लिए शहरी क्षेत्र में ट्रैफिक कंट्रोल का नियम निर्धारित किये गये हैं. इसके लिए शहर के प्रमुख मार्गों पर चेक पोस्ट बनाया गया है, जहां वाहनों को रोका जाता है़
लेकिन निर्धारित अवधि के बाद जब उक्त चेक पोस्ट से गाड़ी खोली जाती है, तो शहर के बीच से पैदल गुजरना भी मुश्किल हो जाता है़ विदित हो कि गढ़वा शहर के बीचोंबीच राष्ट्रीय राजमार्ग -75 गुजरी हुई है़ इसी रोड से निकलकर एक दूसरा एनएच छत्तीसगढ़ की ओर गयी है़ शहर के बीच से उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ व बिहार जाने के लिए बड़े-बड़े वाहन निकलते हैं.
जाम के कारण शहर के लोग घंटों फंसे रहने को विवश हैं. चुनाव जब सिर पर आता है, तब नेताओं को बाइपास की याद आती है़ उस वक्त बाइपास के निर्माण को लेकर नेता बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन खत्म हो जाने व जीत जाने के बाद वे यह कहते हैं कि यह राज्य सरकार के अधीन नहीं, केंद्र सरकार के अधीन है. जबकि वर्तमान में केंद्र व राज्य में एक ही पार्टी भाजपा की सरकार है. ऐसे में गढ़वावासियों को यह उम्मीद जगी थी कि केंद्र के बाद राज्य में भाजपा की सरकार बनने के बाद शहर में बाइपास का निर्माण होगा, लेकिन अभी तक इस मामले में की गयी कार्रवाई के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं.
