भू-माफियाओं का केंद्र बन रहा है गढ़वा

शहरी क्षेत्र में खाली पड़ी जमीन को हथियाने के खेल में कई गिरोह सक्रिय पूर्व एसपी ने कुछ गिरोहों पर कसी थी नकेल, उनके जाते ही फिर शुरू हो गया खेल गढ़वा : गढ़वा शहरी क्षेत्र में अगर जमीन खरीद कर आपने छोड़ रखी है, तो अब सचेत हो जाइये़ अगर आप सचेत नहीं होते […]

शहरी क्षेत्र में खाली पड़ी जमीन को हथियाने के खेल में कई गिरोह सक्रिय

पूर्व एसपी ने कुछ गिरोहों पर कसी थी नकेल, उनके जाते ही फिर शुरू हो गया खेल

गढ़वा : गढ़वा शहरी क्षेत्र में अगर जमीन खरीद कर आपने छोड़ रखी है, तो अब सचेत हो जाइये़ अगर आप सचेत नहीं होते तो अपकी जमीन पर भू-माफिया नजरे गड़ाये बैठे है़ं एक ही दिन में आपकी जमीन में दीवार खड़ी कर दी जायेगी और उसका केवाला भी तैयार करा लिया जायेगा़ आये दिन ऐसे वाकये शहर के विभिन्न क्षेत्रों में देखने व सुनने को ंमिल रही है़

भू-माफियाओं की सेटिंग-गेटिंग अंचल से लेकर ऊपर तक है़ शहरी क्षेत्र में जमीन हड़पने की कहानी हाल के दिनों में ज्यादा बढ़ी है़ पहले खाली जमीन की तलाश की जाती है, फिर उस पर कब्जा का रूपरेखा तैयार होता है़ उसके बाद सरकारी दफ्तरों में उसकी कागज निकाली जाती है और फिर शुरू होता है जमीन हथियाने का काम़ अगर खाली जमीन पर कब्जा के दौरान उसका भू-स्वामी पहुंच गया, तो उसे औने-पौने दाम दे कर रजिस्ट्री कराने का प्रलोभन दिया जाता है़ जब बात नहीं बनती तो शाम, दाम व दंड भेद वाली नीति अपनायी जाती है़ इस मामले में जो भू-स्वामी कमजोर पड़ते हैं, वह अपनी जमीन की आधी से भी कम कीमत लेकर चलते बनते हैं, और जो मजबूत होते हैं वहां खून-खराबे को लेकर दोनो ओर से बंदूकें तनी रहती है़

कई गिरोह हैं सक्रिय

शहर में जमीन की खरीद बिक्री को लेकर कई गिरोह सक्रिय है़ उक्त गिरोह द्वारा अलग-अलग इलाकों में जमीन को हथियाने के हथकंडे अपनाये जाने की खबर सामने आती है. ऐसे ही मामलों में पूर्व एसपी प्रियदर्शी आलोक ने कई गिराहों को सख्त हिदायत देते हुए चेताया था कि इस तरह का मामला दुबारा उनके संज्ञान में आया, तो उन्हें शहर छोड़ना पड़ेगा़ उसके बाद कुछ दिनों तक मामला शांत रहा़ लेकिन उनका तबादला होने के बाद एक बार फिर भू-माफियाओं की चांदी हो गयी है़

जमीन में मुनाफा अधिक होता है

जमीन के खरीब-बिक्री तथा हथियान के मामले में खतरा के साथ-साथ बेहिसाब कमाई भू-माफियाओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है़ भू-माफियाओं द्वारा शहरी क्षेत्र के कीमती जमीन को कम पैसे में सेटिंग-गेटिंग करके उसे काफी ऊंचे दामों में बेचा जाता है़ इससे कमाई 10 गुना तक अधिक हो जाती है़ भू-माफिया वैसे लोगों के पक्ष में भी खड़े हो आते हैं, जिनकी जमीन का विवाद चल रहा होता है़ भू-माफिया साम-दाम-दंड के मदद से उक्त जमीन को अपने कब्जे में लेते हैं और जमीन मालिक को कुछ पैसे देकर उसे अपने नाम करा लेते हैं. बाद में उसी जमीन को काफी ऊंची कीमत पर बाजार में बेच दी जाती है़, जिससे उनकी आमदनी कई गुणा बढ़ जाती है़

सरकारी जमीनों पर भी माफियाओं की नजर

शहरी क्षेत्र में सरकारी जमीन पर भी भू-माफियाओं की नजर लगी हुई है़ कई सरकारी जमीनों का कागजात भी पदाधिकारियों व कर्मियों से मिल कर बनवा लिया जाता है़ उस जमीन को ऊंची कीमत पर बेच दी जाती है़ सरकारी जमीन के कब्जाने में पैसे की बंदरबाट के लिए एक चेन सिस्टम काम करता है और सबको कुछ न कुछ हिस्सा बंधा हुआ है़

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