गढ़वा : एनआरएचएम कार्यक्रम से जुड़ीं जिले भर की सहिया एवं बीटीटी सरकार की उपेक्षापूर्ण नीति से काफी क्षुब्ध हैं. क्षुब्ध इतना कि वे आंदोलन की राह पर बढ़ रही हैं. जिले में करीब 1200 सहिया हैं. सरकार का ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन कार्यक्रम पूरी तरह इन्हीं सहिया पर निर्भर है.
विशेष रूप से केंद्र सरकार का संस्थागत प्रसव कार्यक्रम. आज भारत को जिस तरह विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं अन्य अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्मो पर स्वास्थ्य कार्यक्रम को लेकर अपनी प्रतिष्ठा बचानी की जरूरत है, वह इन स्वास्थ्यकर्मियों के भरोसे है.
लेकिन इनका दर्द है कि सरकार उनसे सारे कार्य तो करा रही है, मगर सुविधा के नाम पर पूरी तरह भेदभाव व उपेक्षा कर रही है. जो काफी दिनों तक बरदाश्त करना संभव नहीं.
– विनोद पाठक –
