सीआरपीएफ कैंप में शौर्य दिवस समारोह का आयोजन
गढ़वा : सीआरपीएफ 172 बटालियन ने शनिवार को स्थानीय सीआरपीएफ के परिसर में शौर्य दिवस समारोह का आयोजन किया. कमांडेंट कैलाश आर्य की अध्यक्षता में आयोजित समारोह में पूरा सीआरपीएफ परिवार शामिल होकर अपने गौरवशाली अतीत को याद किया. कार्यक्रम की शुरुआत कमांडेंट को गॉर्ड ऑफ ऑनर देकर किया गया. इस मौके पर कमांडेंट श्री आर्य ने अधिकारियों व जवानों को संबोधित करते हुए अपने शौर्य दिवस के महत्व पर रोशनी डाली.
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की सीमा से सटे रण ऑफ कच्छ के भारतीय क्षेत्र पर अपना दावा स्थापित करने के लिए पाकिस्तान ने नौ अप्रैल 1965 को भारतीय सीमा की चौकियों के विरुद्ध ऑपरेशन डेजर्ट हॉक चलाया था. इसमें सीआरपीएफ की द्वितीय बटालियन की चार कंपनियां को गुजरात के कच्छ के सरदार और टॉक चौकियों पर रख-रखाव की जिम्मेवारी सौंपी गयी थी. इसमें सीआरपीएफ के जवानों को दृढ़तापूर्वक पाकिस्तानी सेनाओं के साथ युद्ध लड़ी और पाकिस्तान सेना के आक्रमण को नाकाम कर दिया.
इसमें पाकिस्तान के 34 जवान मारे गये और चार को सीआरपीएफ ने जीवित पकड़ लिया था. यद्यपि इस कार्रवाई में आठ जवान भी वीरगति को प्राप्ति हुए थे और 19 जवान को पाकिस्तान सेना ने बंधक बना लिया था. उन्होंने कहा कि हम शौर्य दिवस के अवसर पर सीआरपीएफ के उक्त वीरता को याद करते हैं. यह शौर्य दिवस हमें अपने साहसी जवानों के अनुकरण करने की प्रेरणा देता है. उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ महानिदेशालय नयी दिल्ली ने 172 वाहिनी में रह रहे कुल 671 अधिकारियों व जवानों को आतंरिक सुरक्षा सेवा पदक से अलंकृत किया गया है. इनमें से 523 अधिकारी व जवान अन्य कार्यालयों में स्थानांतरित हो चुके हैं. वहीं 148 अधिकारी व जवान वर्तमान में 172 वाहिनी में उपस्थित हैं.
उन्होंने कहा कि आठ अधिकारी व जवानों को महानिदेशक डिस्क से भी अलंकृत करने के लिए सूचित किया गया है. इस अवसर पर सीआरपीएफ परिसर में सांस्कृतिक प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया. कार्यक्रम में द्वितीय कमान अधिकारी पीएस घोष, उप कमांडेंट योगेंद्र कुमार मिश्रा, सवेंद्र सिंह, सहायक कमांडेंट ओमप्रकाश, एमएच सिद्दीकी सहित सीआरपीएफ के अन्य अधिकारी व जवान उपस्थित थे.
