विरोध : आइसीडीएस योजना के निजीकरण समेत 11 सूत्री मांगों को लेकर
गढ़वा : झारखंड प्रदेश आंगनबाड़ी वर्क्स यूनियन के बैनर तले 11 सूत्री मांगों लेकर समाहरणालय पर बुधवार को प्रदर्शन किया गया. प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष बाल मुकुंद सिन्हा के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन के माध्यम से आइसीडीएस योजना के निजीकरण को वापस लेने का मुद्दा मुख्य रूप से उठाया गया.
समाहरणालय पर प्रदर्शन के पश्चात सेविकाओं को संबोधित करते हुए श्री सिन्हा ने कहा कि 40 वर्ष पूर्व 1975 में शुरू की गयी आइसीडीएस योजना को केंद्र सरकार आइसीडीएस मिशन में बदलने जा रही है. इससे आंगनबाड़ी केंद्र को ठेकेदार, एनजीओ एवं निजी कंपनियां संचालित करेंगी. झारखंड में वेदांता कंपनी को 4000 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित करने का जिम्मा भारत सरकार ने दिया है.
उन्होंने कहा कि एक तरफ जहां भारत सरकार महिलाओं को शक्ति प्रदान करने का नारा दे रही है, वहीं दूसरी ओर 80 लाख महिलाओं को कंपनियों के हाथ की कपपुतली बनने को विवश किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि निजीकरण के फैसले को वापस लेते हुए आंगनबाड़ी सेविका/सहायिका के लिये एक नियमावली बनायी जाये तथा उन्हें तृतीय व चतुर्थवर्ग के कर्मचारी का दर्जा दिया जाये. सेवानिवृति के समय एकमुश्त पांच लाख रुपये का भुगतान एवं मासिक पेंशन निर्धारित किया जाये. प्रदर्शन के बाद उपायुक्त के माध्यम से प्रधानमंत्री को मांगपत्र प्रेषित किया गया. इसके अलावा छह सूत्री मांगपत्र अलग से गढ़वा उपायुक्त को भी देते हुए उन्हें अपने स्तर से कार्रवाई करने की मांग की गयी.
इस अवसर पर वीणा सिन्हा, रामचंद्र पासवान, विश्वनाथ राम रवि, रेखा देवी, रीता देवी, शीला देवी, कुसुम देवी, मालती देवी, श्याम दुलारी देवी, अनिता पांडेय, सोमारी देवी, रंभा देवी, नैना देवी, रंजना देवी समेत कई सेविका-सहायिका उपस्थित थीं.
