गढ़वा : पूरे देश में सरकार द्वारा स्वच्छता अभियान के साथ-साथ खुले में शौच से मुक्त के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन इसका असर गढ़वा के शहरी क्षेत्र में देखने को नहीं मिलता. वैसे तो अभियान के लिए नेता व अधिकारी फोटो खिंचा कर इसकी शुरुआत कर देते हैं, लेकिन उसके बाद उस योजना का क्या हश्र हुआ, यह मुड़ कर देखने की जहमत कोई नहीं उठाता.
सरकार द्वारा गांवों में खुले में शौच से मुक्त के लिए पंचायत स्तर पर जोर-शोर से अभियान चलाया जा रहा है. इसके लिए सरकार अनुदान पर शौचालय बनाने के लिए करोड़ों रुपये का आवंटन कर चुकी है, लेकिन दुखद पहलू यह है कि शहरी क्षेत्र जहां ज्यादातर समझदार व पढ़े-लिखे लोग रहते हैं, इसके बावजूद यहां खुले में शौच का रिवाज थमने का नाम नहीं ले रहा है.
शहर के बीच से गुजरी दानरो व सरस्वतिया नदी के लगभग चार किमी की दूरी में कहीं भी ऐसा जगह नहीं है, जहां लोगों ने शौच कर नदी को गंदा नहीं किया हो. टंडवा को जोड़नेवाली रंका रोड पुल के दोनों तरफ जहां छठ घाट है, वहां खुले में शौच के कारण नदी को पैदल पार होना काफी मुश्किल लगता है. आखिर शहरी लोगों के लिए सरकार अलग से जागरूकता अभियान चलायेगी. या शहरी लोगों को जागरूक करने के लिए जागरूकता अभियान की आवश्यकता है.
बहरहाल सरकार के अभियान से पंचायत व गांव खुले में शौच से मुक्त भले ही हो जाये, लेकिन शहरी क्षेत्र में यह संभव नहीं दिखता. जगह-जगह पर शौचालय बने होने के बावजूद गंदगी का ऐसा आलम और कहीं देखने को नहीं मिलता है.
