2..ग...25 किमी पैदल चल कर पहुंचे मतदाता

2..ग…25 किमी पैदल चल कर पहुंचे मतदातासरुअत पहाड़ी पर बसे आदिम जनजाति के लोग अपना वोट देने पहाड़ के नीचे स्थित अपने बूथ तक आये थेचार बजे भोर ही वोट देने के लिए निकले आदिम जनजाति22जीडब्लूपीएच25-लंबी दूरी तय कर मतदान करने आये आदिम जनजाति के लोगबड़गड़(गढ़वा) : छत्तीसगढ़ की सीमा से सटे उग्रवाद प्रभावित बड़गड़ […]

2..ग…25 किमी पैदल चल कर पहुंचे मतदातासरुअत पहाड़ी पर बसे आदिम जनजाति के लोग अपना वोट देने पहाड़ के नीचे स्थित अपने बूथ तक आये थेचार बजे भोर ही वोट देने के लिए निकले आदिम जनजाति22जीडब्लूपीएच25-लंबी दूरी तय कर मतदान करने आये आदिम जनजाति के लोगबड़गड़(गढ़वा) : छत्तीसगढ़ की सीमा से सटे उग्रवाद प्रभावित बड़गड़ प्रखंड में मतदाताओं ने निर्भिक होकर अपने मत का प्रयोग किया. जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, मुखिया व वार्ड सदस्य को चुनने के लिए टेहरी पंचायत के सरूअत पहाड़ी पर बसे आदिम जनजाति के लोगों ने भी पहाड़ी के दुर्गम रास्तों को पारकर वोट देने आये थे. इनका मतदान केंद्र टेहरी पंचायत के रूद गांव स्थित मतदान केंद्र संख्या 48 पर करीब 25 किमी दूर अवस्थित था. अब इसे आदिम जनजातियों की अपने मतदान के प्रति आयी जागरूकता समझा जाये अथवा उन्हें इतनी दूर तक पैदल मतदान करने पहुंचने के लिए प्रत्याशियों की मेहनत. सरूअत के मतदाता महेंद्र किसान, डिगर किसान, लादू कोरवा, रूझन कोरवा, पियारी कोरवा, फिदू किसान आदि ने कहा कि वे लोग चार बजे भोर में ही घर से निकले हैं. पहाड़ से नीचे उतरने में कोई रास्ता नहीं होने एवं जंगल से घने जंगल से गुजरने में उन्हें काफी परेशानी होती है. जो भी हो लोकतंत्र के लिये यह एक शुभ संकेत है कि अशिक्षित एवं पूरी तरह जंगली जीवन बितानेवाले आदिम जनजाति के लोग भी वोट देने का महत्व जानने लगे हैं.

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