गढ़वा: मुखिया अब बेचारे हो गये हैं-2

गढ़वा: मुखिया अब बेचारे हो गये हैं-2 यादों में27जीडब्ल्यूपीएच20-पूर्व उप मुखिया सराज मंसूरीरमकंडा(गढ़वा). विराजपुर गांव निवासी सराज मंसूरी लंबे समय तक उप मुखिया रहे हैं. जब उनसे आज के पंचायत चुनाव एवं मुखिया की बात की जाती है, तो वे काफी व्यथित होते हैं. वर्तमान दौर से जब वे पूर्व की स्थिति की तुलना करते […]

गढ़वा: मुखिया अब बेचारे हो गये हैं-2 यादों में27जीडब्ल्यूपीएच20-पूर्व उप मुखिया सराज मंसूरीरमकंडा(गढ़वा). विराजपुर गांव निवासी सराज मंसूरी लंबे समय तक उप मुखिया रहे हैं. जब उनसे आज के पंचायत चुनाव एवं मुखिया की बात की जाती है, तो वे काफी व्यथित होते हैं. वर्तमान दौर से जब वे पूर्व की स्थिति की तुलना करते हैं, तो काफी निराश होते हैं. उनका कहना है कि पहले जो मुखिया होते थे, उनका प्रभाव होता था. अधिकारी मुखिया के साथ चलते थे. लेकिन अब के दौर में मुखिया बेचारे हो गये हैं. अफसरशाही हावी है. पहले मुखिया होना गौरव की बात होती थी. अब वह कहां. पहले और अब के पंचायत चुनाव के बारे में उन्होंने कहा कि पहले के पंचायत चुनाव में पंचायत स्तर पर बैठक होती थी, इसी में योग्य उम्मीदवार का चुनाव होता था. लेकिन आज के दौर में वैसा नहीं है. पहले मतदाता खुद प्रत्याशी के पक्ष में वोट करने की बात कहते थे. पहले भ्रष्टाचार नहीं था. लेकिन आज के दौर में नीचे से लेकर उपर तक भ्रष्टाचार फैला हुआ है. अब के पंचायत चुनाव में जात-पात के नाम पर प्रतिनिधि चयन किये जा रहे हैं. इसलिये योग्य लोग पीछे छूट जा रहे हैं. पहले यहीं कारण है कि पंचायत राज व्यवस्था फैल हो रही है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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